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Bangladesh Election से पहले अल्पसंख्यकों में खौफ, कट्टरपंथ और असुरक्षा में फंसे ईसाई और हिंदू समुदाय
Minority Insecurity Report: बांग्लादेश में 12 फरवरी के चुनावों से पहले अल्पसंख्यकों में असुरक्षा बढ़ी है। कट्टरपंथ और चर्च निर्माण में बाधाओं के बीच ईसाई और हिंदू समुदाय असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
- Written By: प्रिया सिंह

बांग्लादेश चुनाव (सोर्स-सोशल मीडिया)
Bangladesh Pre-Election Minority Safety: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की गहरी भावना देखी जा रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के ईसाई, हिंदू और बौद्ध समुदाय बढ़ती कट्टरता और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण डरे हुए हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार के दौरान उग्रवाद के प्रति उदासीनता ने उत्पीड़न और महंगाई को और अधिक बढ़ावा दिया है। फॉरगॉटन मिशनरीज इंटरनेशनल (FMI) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा अराजकता का फायदा उठाकर कट्टरपंथी तत्व अब पहले से अधिक सक्रिय हो रहे हैं।
चुनाव पूर्व गहराता संकट
बांग्लादेश में होने वाले आगामी 12 फरवरी के चुनावों की तैयारी के बीच सामाजिक माहौल पूरी तरह से अनिश्चितता और भारी तनाव से भर गया है। फॉरगॉटन मिशनरीज इंटरनेशनल के ब्रूस एलन के अनुसार देश के हालात पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गए हैं और लोगों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। दिसंबर में छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी द्वारा जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन करने से अल्पसंख्यकों के मन में भविष्य को लेकर गहरी आशंकाएं बढ़ गई हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रहार
देश में ईसाई समुदायों को अपने धार्मिक स्थलों के निर्माण में भारी बाधाओं और स्थानीय मुस्लिम पड़ोसियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पादरी ‘मिंटू’ का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि पड़ोसियों के विरोध के कारण उनके चर्च निर्माण का काम पिछले डेढ़ साल से ठप पड़ा है। कट्टरपंथी तत्वों की सक्रियता के कारण अब चर्च स्थापित करने वाले पादरियों और उनकी मंडलियों को खुलेआम गंभीर धमकियों और खतरों का सामना करना पड़ता है।
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जमीन और बेदखली का डर
बांग्लादेश में कई ईसाई परिवार ऐसे भूखंडों पर रहने को मजबूर हैं जिनका कानूनी स्वामित्व उनके पास नहीं है बल्कि वह सरकार का है। जमीन का मालिकाना हक मुस्लिम पड़ोसियों या सरकार के पास होने के कारण इन गरीब ईसाई परिवारों को कभी भी बेदखली का डर सताता रहता है। बहुसंख्यक समाज के पास सारी राजनीतिक और सामाजिक शक्ति होने की वजह से ईसाई समुदाय का उनके साथ संबंध हमेशा बहुत ही संवेदनशील बना रहता है।
राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव
कार्यवाहक सरकार के दौरान देश की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ी है जिससे आम जनता के बीच बढ़ती महंगाई और गुस्से की लहर साफ देखी जा रही है। ब्रूस एलन का मानना है कि जेनरेशन-जेड का राजनीतिक आंदोलन अब बिखर रहा है जिससे अराजकता की स्थिति और भी ज्यादा गंभीर और अनियंत्रित हो गई है। अल्पसंख्यक समुदाय महसूस करते हैं कि राजनीतिक दल उनके हितों की रक्षा करने के बजाय केवल सत्ता संघर्ष और अपने गठबंधन बनाने में ही उलझे हुए हैं।
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बढ़ती कट्टरता और चिंता
मिशन नेटवर्क न्यूज में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कट्टरपंथी मुसलमान मौजूदा अराजकता का लाभ उठाकर अब बहुत अधिक सक्रिय और हिंसक हो रहे हैं। अल्पसंख्यकों को सुरक्षित महसूस कराने के लिए देश में प्रभावी कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। असुरक्षा की इस भावना ने देश के ईसाई, हिंदू और बौद्ध समुदायों के बीच एक ऐसा माहौल बना दिया है जहां वे अपने भविष्य को लेकर सशंकित हैं।
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