Bangladesh: बीएनपी का ‘फजर प्लान’! मतदान केंद्रों पर नमाज और वोटों की पहरेदारी; तारिक रहमान की अपील से हड़कंप
Bangladesh Election: 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने समर्थकों से मतदान केंद्रों पर फजर की नमाज अदा करने और गिनती पूरी होने तक वहां डटे रहने की अपील की है।
- Written By: अमन उपाध्याय
तारिक रहमान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Election News In Hindi: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित आम चुनाव से ठीक पहले देश का राजनीतिक माहौल तेजी से गरमाता नजर आ रहा है। चुनावी सरगर्मियों के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लेकर एक अलग ही तरह की अपील कर सबका ध्यान खींचा है।
ढाका के जात्राबारी इलाके में आयोजित एक बड़ी चुनावी रैली को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने समर्थकों से कहा कि वे मतदान वाले दिन खास तौर पर अनुशासन और आस्था का पालन करें। उन्होंने अपील की कि कार्यकर्ता और समर्थक न सिर्फ उस दिन सुबह जल्दी उठें, बल्कि मतदान केंद्रों पर समय से पहुंचकर फजर की अनिवार्य नमाज अदा करें। इसके साथ ही उन्होंने तहज्जुद जैसी स्वैच्छिक रात की प्रार्थना करने पर भी जोर दिया।
वोटों की गिनती तक डटे रहने का आदेश
तारिक रहमान ने स्पष्ट किया कि केवल वोट डालना काफी नहीं है। उन्होंने समर्थकों को निर्देश दिया है कि वे नमाज के बाद मतदान केंद्र से तब तक न हटें जब तक कि वोटों की गिनती पूरी न हो जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदान केंद्र पर रुकें ताकि कोई साजिश न रच सके और यह सुनिश्चित करें कि वोटों की सही गिनती हो। तहज्जुद की नमाज का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे मुश्किल समय में ईश्वर से मदद मांगने का जरिया बताया।
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अपील के पीछे का डर और सुरक्षा संकट
सूत्रों के अनुसार, बीएनपी की इस रणनीति के पीछे संस्थाओं पर अविश्वास और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत पुलिस बल को कमजोर माना जा रहा है। प्रशासन ने कुल 42,779 मतदान केंद्रों में से लगभग 24,000 केंद्रों को ‘उच्च या मध्यम जोखिम’ वाला घोषित किया है। बीएनपी को आशंका है कि कम पुलिस बल के कारण केंद्रों पर कब्जा या चुनावी गड़बड़ी हो सकती है।
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बढ़ती चुनावी हिंसा
बांग्लादेश में चुनाव से पहले माहौल काफी हिंसक बना हुआ है। मानवाधिकार समूह ‘ऐन ओ सालिश केंद्र’ (ASK) के अनुसार, जनवरी 2026 में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं पिछले महीने की तुलना में तीन गुना बढ़ गई हैं जिनमें 11 मौतें और 616 लोग घायल हुए हैं। कई स्थानों पर आगजनी, हथियारों की बरामदगी और राजनीतिक हत्याएं दर्ज की गई हैं, जिससे मतदाताओं में भारी डर है।
