

Anti-Hindu violence in Bangladesh election 2026: बांग्लादेश में आगामी आम चुनावों से पहले कट्टरपंथी ताकतों ने हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक और अपमानजनक अभियान छेड़ दिया है। कई वीडियो में मौलानाओं को खुलेआम हिंदुओं को 'काफिर' बताते हुए उन्हें वोट देना 'हराम' घोषित करते सुना जा सकता है। कट्टरपंथियों की यह भीड़ न केवल हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही है, बल्कि उनके मंदिरों और जीवन पर भी हमला कर रही है। भारत और ब्रिटेन जैसे अंतरराष्ट्रीय देशों ने इन बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अल्पसंख्यक सुरक्षा की मांग की है।
बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले नफरत की दुकानें खुल गई हैं, जहां कट्टरपंथी मौलवी गैर-मुसलमान प्रत्याशियों के बहिष्कार की अपील कर रहे हैं। वे खुलेआम मंदिरों को तहस-नहस करने की धमकियां दे रहे हैं और 'इस्कोन' जैसे संगठनों को देश से निकालने की बात कह रहे हैं। चुनावी रैलियों में कट्टरपंथी तत्व हिंदुओं को 'दिल्ली के दलाल' बताकर उनके खिलाफ हिंसा भड़का रहे हैं जो बेहद चिंताजनक है।
पिछले कुछ हफ्तों में बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंदुओं को निशाना बनाकर उनकी नृशंस हत्या के कम से कम 7 से 8 मामले सामने आए हैं। 25 वर्षीय मिथुन सरकार ने भीड़ के डर से नहर में छलांग लगा दी जिससे उनकी मौत हो गई, जबकि मोनी चक्रवर्ती को गोली मार दी गई। कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं को पीट-पीटकर मारने और उन पर झूठे आरोप लगाने की घटनाओं ने अल्पसंख्यकों में भारी डर पैदा कर दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने और हिंदू नागरिकों एवं कारोबारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यकों को टारगेट करना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के खिलाफ है और इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। भारत ने बांग्लादेशी अधिकारियों को सुरक्षा के मामले में अपनी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ब्रिटिश संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ कॉमन्स' में सांसद बॉब ब्लैकमैन ने बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों और मंदिरों को जलाए जाने की भयावह स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लेबर पार्टी की सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है ताकि अगले महीने होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सकें। ब्रिटेन ने हर तरह की हिंसा की निंदा करते हुए बांग्लादेश में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने की जोरदार अपील की है।
बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी अवामी लीग को चुनाव से प्रतिबंधित किए जाने के फैसले की भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना हो रही है। सर्वे के अनुसार अवामी लीग के पास 30 प्रतिशत समर्थन है, फिर भी उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है जो निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। इस्लामी चरमपंथी अब संविधान बदलने के लिए जनमत संग्रह की मांग कर रहे हैं, जिससे बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के पूरी तरह नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।