बालेन शाह (सोर्स- सोशल मीडिया)
Balendra Shah Oath Ceremony: नेपाल में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने गुरुवार को वरिष्ठ नेता बालेंद्र शाह को अपनी संसदीय दल का नेता चुना, जिससे वह देश के नए प्रधानमंत्री बनने की राह साफ हो गई है। पार्टी ने बालेंद्र शाह को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ा था। बालेंद्र शाह ने पांच मार्च के संसदीय चुनावों में शानदार जीत हासिल की और प्रतिनिधि सभा की 275 सीटों में से 182 सीटें जीतीं। शुक्रवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के समक्ष हिंदू रीति-रिवाज के तहत आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बालेंद्र शाह प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
आरएसपी की केंद्रीय समिति ने गुरुवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया कि बालेंद्र शाह काठमांडू महानगरपालिका के मेयर रह चुके हैं, उन्हें संसदीय दल का नेता नियुक्त किया जाए। यह कदम विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद लागू होगा। पार्टी के नियमों के मुताबिक केवल संसदीय दल का नेता ही प्रधानमंत्री बन सकता है।
नेपाल चुनाव में शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से हराया। शाह को कुल 68,348 वोट मिले, जबकि ओली को 18,734 वोट ही हासिल हुए। यह 1991 के बाद नेपाल के संसदीय चुनावों में किसी भी उम्मीदवार द्वारा प्राप्त सबसे अधिक मतों में से एक है, जो उनकी बड़ी राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है।
बालेंद्र शाह प्रधानमंत्री पद की शपथ सामान्य प्रथा से अलग तरीके से लेंगे। समारोह 12:34 बजे निर्धारित किया गया है। इस दौरान सात शंख वादक शंखनाद करेंगे। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जिसके बारे में माना जाता है कि यह किसी भी शुभ कार्य की सफलता सुनिश्चित करता है। शपथ ग्रहण के समय अन्य अनुष्ठान भी किए जाएंगे। 108 बटुक (वैदिक पुरोहित) स्वस्ति शांति का पाठ करेंगे जबकि 16 बौद्ध भिक्षु अष्टमंगल का जाप करेंगे, जिन्हें हिंदू और बौद्ध परंपराओं में शुभ माना जाता है।
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बालेंद्र शाह ने 2022 में राजनीति में प्रवेश किया, जब उन्होंने काठमांडू के मेयर पद के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में मधेसी परिवार में जन्मे शाह ने प्रारंभिक शिक्षा काठमांडू में पूरी की और बाद में भारत की विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि ने उन्हें अवसंरचना, शहरी विकास और सार्वजनिक कार्यों की व्यावहारिक समझ दी जिसने उन्हें काठमांडू महानगरपालिका के मेयर के रूप में उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण को आकार देने में मदद की।