काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह (सोर्स - सोशल मीडिया)
Balen Shah Nepal Election Policy: नेपाल में 5 मार्च को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है जब लोकप्रिय नेता बालेन शाह ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के गढ़ झापा-5 से चुनाव लड़ते हुए अपने घोषणापत्र से अरबों रुपये की एक चीनी औद्योगिक परियोजना को हटा दिया है। बालेन शाह नेपाल चुनाव नीति के तहत यह कदम चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पिछले साल हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद बनी अंतरिम सरकार के तहत चुनाव होने वाले हैं।
35 वर्षीय इंजीनियर और रैपर से राजनेता बने बालेन शाह वर्तमान में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। उनके प्रतिद्वंदी केपी शर्मा ओली ने अपने 41-पॉइंट वाले पत्र में इस इंडस्ट्रियल पार्क के निर्माण और उसे पूरा करने की बात को प्रमुखता से लिखा है। बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) का यह कदम ओली के बीजिंग के साथ करीबी संबंधों और उनकी चीनी नीतियों को एक सीधी चुनौती है।
झापा में स्थित दमक इंडस्ट्रियल पार्क का नाम बदलकर अब ‘नेपाल-चीन फ्रेंडशिप इंडस्ट्रियल पार्क’ कर दिया गया है जो अब फिर से सुर्खियों में आ गया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना की नींव फरवरी 2021 में पूर्व पीएम ओली द्वारा रखी गई थी लेकिन तब से यह अपने वित्तीय मॉडल के कारण विवादों में है। बालेन शाह के सहयोगियों का कहना है कि वे इस प्रोजेक्ट से जुड़े तमाम विवादों से अच्छी तरह अवगत हैं इसलिए उन्होंने इसे घोषणापत्र से बाहर रखा है।
यह प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पार्क नेपाल-भारत सीमा के निकट और विशेष रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के पास स्थित होना तय हुआ है। नBalen Shahई दिल्ली ने इस स्थान को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की थी और इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ‘रेड लाइन’ के रूप में चिन्हित किया है। भारत ने नेपाली कांग्रेस और यूएमएल दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों को इस संवेदनशील परियोजना पर आगे न बढ़ने की स्पष्ट सलाह पहले ही दे दी थी।
नेपाल में बीआरआई परियोजनाओं के वित्तीय प्रभावों को लेकर गहरी चिंता है क्योंकि श्रीलंका जैसे देशों को चीनी निवेश के कारण भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ा है। चीनी पक्ष ने शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के लिए कई वित्तपोषण विकल्प दिए थे लेकिन कर छूट और ऋण की शर्तों पर नेपाल में मतभेद बने रहे। नेपाली कांग्रेस विशेष रूप से किसी भी प्रकार का वाणिज्यिक ऋण लेने के खिलाफ थी जिसके कारण परियोजना के अंतिम समझौते के शब्दों में बदलाव करना पड़ा था।
चीन द्वारा बड़े पैमाने पर मांगी गई कर छूट काठमांडू के लिए एक बड़ी बाधा थी जिसका नेपाल के वित्त मंत्रालय ने कड़ा विरोध किया था। बीजिंग चाहता था कि यह छूट केवल निर्माण के समय तक सीमित न रहे बल्कि परियोजना पूर्ण होने के कई वर्षों बाद तक लागू रहनी चाहिए। हालांकि इस विवाद के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री ओली की अध्यक्षता में हुई नेपाल निवेश बोर्ड की बैठक में इस परियोजना को तेज करने का निर्णय लिया गया था।
बीआरआई के तहत शुरू की गई कई परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अब तक उल्लेखनीय देरी देखी गई है जिससे इनकी प्रभावशीलता पर बड़े अंतरराष्ट्रीय सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन की इनमें से कोई भी परियोजना अब तक अपने अंतिम रूप को प्राप्त नहीं कर सकी है जिससे नेपाल के आर्थिक लाभ पर संशय है। बालेन शाह द्वारा इसे घोषणापत्र से हटाना दर्शाता है कि नेपाल का एक वर्ग अब चीनी निवेश के बजाय देश की संप्रभुता और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
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बालेन शाह को नेपाल के युवाओं और ‘जेन-ज़ी’ पीढ़ी की पहली पसंद माना जाता है जिन्होंने पिछले साल भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए थे। भले ही उन्होंने पहले अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के प्रस्ताव से खुद को अलग कर लिया था लेकिन अब वे संसदीय चुनाव में मुख्य दावेदार बनकर उभरे हैं। झापा में उनकी बढ़ती पैठ और चीनी प्रोजेक्ट पर उनका कड़ा रुख नेपाल की भविष्य की विदेश नीति में बड़े बदलाव की ओर स्पष्ट संकेत दे रहा है।