Balen Shah Nepal Govt New Salary Policy: बालेन शाह के नेतृत्व में बनी नेपाल की नई सरकार लगातार बड़े और सख्त फैसले लेकर चर्चा में है। सत्ता संभालने के बाद से ही सरकार ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुधारों पर आक्रामक रुख अपनाया है। पूर्व प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों और अधिकारियों समेत करीब 100 लोगों की संपत्तियों की जांच शुरू की जा चुकी है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
इसी बीच सरकार ने दो अहम फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। पहला बड़ा फैसला सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से जुड़ा है। अब नेपाल (Nepal) में कर्मचारियों को हर महीने की बजाय हर 15 दिन में वेतन दिया जाएगा। यह निर्णय 17 अप्रैल को वित्त स्तर पर लिया गया और इसे लागू करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इस कदम से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, जब कर्मचारियों के हाथ में बार-बार पैसा आएगा तो खर्च भी बढ़ेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। आमतौर पर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और मालदीव जैसे दक्षिण एशियाई देशों में सरकारी कर्मचारियों को मासिक वेतन दिया जाता है, ऐसे में नेपाल (Nepal) का यह कदम अलग और प्रयोगात्मक माना जा रहा है। दूसरा बड़ा फैसला शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र और कर्मचारी संगठनों को भंग करने के निर्देश दिए हैं। सिंह दरबार स्थित सचिवालय में कुलपतियों और संस्थानों के प्रमुखों के साथ लंबी बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि ‘जेन जेड’ आंदोलन के बाद छात्र राजनीति की प्रासंगिकता कम हो गई है, इसलिए अब संस्थानों को केवल शिक्षा और शोध पर ध्यान देना चाहिए।
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इन फैसलों से साफ है कि बालेन शाह सरकार प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और संस्थागत बदलावों को लेकर तेजी से काम कर रही है। हालांकि, इन निर्णयों के दीर्घकालिक प्रभाव क्या होंगे, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो पाएगा।