अफगानिस्तान में फिर सेना उतारने की तैयारी में ट्रंप, बगराम एयरबेस को लेकर तालिबान से बढ़ा विवाद
Afghanistan News: बगराम एयरबेस पर कब्जे को लेकर अमेरिका और तालिबान के बीच तनाव बढ़ गया है। तालिबान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अफगान विदेश नीति अब आर्थिक हितों पर आधारित है।
- Written By: अक्षय साहू
बगराम एयरबेस (फोटो- सोशल मीडिया)
Bagram Air Base US Taliban Controversy: बगराम एयरबेस पर कब्जे को लेकर अमेरिका और तालिबान सरकार के बीच शुरू हुआ विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच तालिबान सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि तालिबान बगराम वायुसेना अड्डा अमेरिका को वापस सौंप सकता है।
अमेरिका ने जब 2021 में जल्दी-जल्दी अफगानिस्तान छोड़ा था, तब तालिबान ने बगराम एयरबेस पर कब्जा कर लिया था। अब राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि तालिबान अमेरिका को यह अड्डा फिर से दे सकता है , क्योंकि वह आर्थिक तंगी, आंतरिक झगड़े और अन्य आतंकी संगठनों से खतरे जैसी मुश्किलों से जूझ रहा है।
तालिबान ने दिया करारा जवाब
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहउल्ला मुजाहिद ने ट्रंप की बातों को गलत और बेबुनियाद बताया। उन्होंने अमेरिका को हकीकत समझने और तर्क से काम लेने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान की विदेश नीति अब अपने आर्थिक हितों पर आधारित है, और सभी देशों से साझे हितों के आधार पर संबंध रखना चाहता है।
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तालिबानी प्रवक्ता ने साफ कहा कि अमेरिका को पहले भी कई बार बताया गया है कि अफगानिस्तान की आज़ादी और उसकी सीमाएं सबसे ज़्यादा जरूरी हैं। उन्होंने याद दिलाया कि दोहा समझौते में अमेरिका ने वादा किया था कि वह अफगानिस्तान के भीतरूनी मामलों में दखल नहीं देगा, और न ही ताकत का इस्तेमाल करेगा।
अगस्त में मनाई थी बगराम कब्जे की तीसरी सालगिरह
मुजाहिद ने कहा कि अमेरिका को अपने वादों पर टिके रहना चाहिए। हालांकि उन्होंने ट्रंप के बयान या उनके प्रशासन के साथ बगराम को लेकर हुई बातचीत पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
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बता दे कि पिछले साल अगस्त में तालिबान ने बगराम पर कब्जे की तीसरी सालगिरह मनाई थी, जिसमें उन्होंने अमेरिका के छोड़े हुए हथियार और सामान की प्रदर्शनी भी लगाई थी, जिससे व्हाइट हाउस की भी नजर इस पर गई थी। ट्रंप कई बार बगराम एयरबेस को चीन के खिलाफ अहम बता चुकें है। उनका दावा है कि यह एयरबेस चीन के उन ठिकानों से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर है, जहां चीन ने अपने कई मिसाइल तैनात कर रखे हैं। इसलिए वो किसी भी हाल में इसे अपने कब्जे में लेना चाहते हैं।
