उर्सुला वॉन डेर लेयेन और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Australia EU Critical Minerals Deal: वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक समीकरणों को बदलने वाले एक बड़े घटनाक्रम में ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और ‘रेयर अर्थ्स’ की आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भरता को कम करना है। लगभग आठ वर्षों की लंबी बातचीत और विचार-विमर्श के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया है।
वर्तमान में, चीन वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं पर हावी है और ‘रेयर अर्थ्स’ के प्रसंस्करण (Processing) के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है। ये खनिज आधुनिक तकनीक जैसे इलेक्ट्रिक कार, लिथियम-आयन बैटरी, एलईडी टेलीविजन और कैमरा लेंस के उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ऑस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित करते हुए कहा कि हम किसी भी एक आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भर नहीं रह सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोप और ऑस्ट्रेलिया दोनों के लिए चीन के साथ रणनीतिक संतुलन बनाना एक अनिवार्यता है, और यह साझेदारी हमारी सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगी।
इस समझौते के तहत, ऑस्ट्रेलिया से यूरोपीय संघ को निर्यात किए जाने वाले लगभग सभी महत्वपूर्ण खनिजों पर से आयात शुल्क (Tariff) हटा दिया जाएगा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस समझौते से ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को सालाना लगभग 10 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ($7 बिलियन) का लाभ होगा।
साथ ही, यह समझौता ऑस्ट्रेलिया को निर्यात किए जाने वाले यूरोपीय संघ के 99 प्रतिशत से अधिक सामानों पर से शुल्क हटा देगा, जिससे यूरोपीय कंपनियों को सालाना 1 बिलियन यूरो ($1.2 बिलियन) की बचत होगी। अगले एक दशक में ऑस्ट्रेलिया को यूरोपीय निर्यात में 33 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की उम्मीद है।
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। एक तरफ जहां मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक सुरक्षा के लिए देश नए गठबंधन बना रहे हैं। यूरोपीय संघ ऑस्ट्रेलिया का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और विदेशी निवेश का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत रहा है, और यह नई डील इस रिश्ते को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।
यह भी पढ़ें:- युद्ध के बीच ईरान में कौन ले रहा फैसले? ट्रंप के दावों और हकीकत के बीच उलझी तेहरान की सत्ता, आखिर क्या है सच
प्रधानमंत्री अल्बनीज ने विश्वास व्यक्त किया कि शुल्क हटाने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर करने में मदद मिलेगी और महत्वपूर्ण खनिजों के बाजार में विविधता आएगी। इस समझौते को केवल एक व्यापारिक सौदे के रूप में नहीं, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एक मजबूत आर्थिक ढाल के रूप में देखा जा रहा है।