

एंडी बर्नहैम दास व्यापार के ऐतिहासिक अन्याय पर माफी मांगने को तैयार
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने गुलामी के लिए मुआवजा देने का विरोध किया
किंग चार्ल्स ने भी कैरेबियाई दौरे पर गुलामी के इतिहास का जिक्र किया
Andy Burnham Slave Trade Apology: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम कॉमनवेल्थ समिट में शामिल होने से पहले ने ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस ऐतिहासिक अन्याय के लिए खुले मन से माफी मांगने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की ओर से किसी भी तरह का मुआवजा देने के पक्ष में नहीं हैं। बर्नहैम ने यह बात ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' में प्रकाशित अपने लेख में कही है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें उन लोगों के दर्द का एहसास है, जिन्होंने गुलामी और उससे जुड़ी क्रूरता को सहन किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक त्रासदी पर दुख जताते हुए कहा कि अतीत में किए गए अत्याचारों के निशान आज भी पूरी तरह मिटे नहीं हैं। बर्नहैम के मुताबिक, मुआवजा बांटना इस समस्या का उचित समाधान नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एक अन्याय के बदले दूसरे प्रकार का अन्याय करना सही नहीं होगा।
एंडी बर्नहैम का यह बयान ऐसे समय आया है, जब किंग चार्ल्स कैरेबियाई देशों के दौरे पर हैं। बहामास में अपने दौरे के दौरान उन्होंने गुलामी के इतिहास का उल्लेख किया और ब्रिटिश शासनकाल में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। ब्रिटेन की ओर से इस मुद्दे पर अब तक औपचारिक माफी नहीं मांगी गई है। हालांकि, दास व्यापार के ऐतिहासिक प्रभाव और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए इस विषय पर चर्चा तेज हुई है।
ब्रिटेन यह स्वीकार करता है कि ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार से देश को आर्थिक लाभ हुआ था। साथ ही, उसका यह भी कहना है कि बाद में इस व्यापार को समाप्त करने में ब्रिटेन ने भूमिका निभाई। वर्ष 1833 में ब्रिटिश संसद ने गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने के लिए कानून पारित किया था। हालांकि, गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने के बावजूद ब्रिटेन ने दूसरे देशों पर अपना औपनिवेशिक शासन जारी रखा और वहां के संसाधनों का दोहन करता रहा।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम जल्द ही भारत की यात्रा कर सकते हैं। एक वरिष्ठ राजनयिक ने बृहस्पतिवार को दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का उल्लेख करते हुए यह जानकारी दी।
भारत में ब्रिटेन के कार्यवाहक उच्चायुक्त बेन मेलर ने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को बताया कि प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद बर्नहैम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के दौरान भारत आने की इच्छा जाहिर की थी।
मेलर ने कहा कि बर्नहैम भारत की यात्रा को लेकर काफी उत्सुक हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद बर्नहैम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत हुई थी। उस दौरान बर्नहैम ने सीधे तौर पर भारत आने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी।
ब्रिटिश उच्चायुक्त के मुताबिक, उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच इस प्रस्तावित यात्रा को लेकर जल्द ही सकारात्मक प्रगति देखने को मिलेगी। यह दौरा भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ती साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।