US: ट्रंप बोले अमेरिका को चाहिए टैलेंट, बदलेगा H-1B वीजा सिस्टम
America: डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा नीति पर नरमी दिखाते हुए कहा कि अमेरिका को विदेशी कुशल लोगों की जरूरत है ताकि देश की इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी आगे बढ़ सके।
- Written By: प्रिया सिंह
डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स - सोशल मीडिया)
Trump Signals H-1B Visa Reform Shift: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख अब बदलता दिखाई दे रहा है। जहां पहले वे विदेशी कामगारों के विरोध में थे, अब वे उनके पक्ष में बातें कर रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को दुनिया में आगे रहने के लिए टैलेंट की जरूरत है। उन्होंने माना कि हर बेरोजगार व्यक्ति को विशेषज्ञ नहीं बनाया जा सकता।
अमेरिका को चाहिए टैलेंट
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पुराने सख्त रुख से पीछे हटते हुए कहा है कि देश को विदेशी कुशल लोगों की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिर्फ घरेलू बेरोजगारों पर निर्भर रहकर अमेरिका अपनी इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी को आगे नहीं बढ़ा सकता। एक टीवी इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “मैं सहमत हूं कि हमें अमेरिकी मजदूरों की तनख्वाह बढ़ानी चाहिए, लेकिन हमें यह टैलेंट भी बाहर से लाना होगा। अगर हम दुनिया में आगे रहना चाहते हैं, तो हमें विशेषज्ञों की जरूरत है।”
नई वीजा नीति में बड़ा बदलाव
सितंबर में ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा की फीस में भारी बढ़ोतरी की थी। पहले जहां वीजा आवेदन शुल्क 1,500 डॉलर थी, अब इसे बढ़ाकर 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) कर दिया गया है। यह नया नियम 21 सितंबर के बाद दाखिल किए गए सभी नए आवेदन और 2026 की वीजा लॉटरी पर लागू होगा। हालांकि, जिनके पास पहले से वीजा है या जिन्होंने पहले आवेदन किया है, वे इस नियम से प्रभावित नहीं होंगे।
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बेरोजगार को नहीं बना सकता मिसाइल
इंटरव्यू के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका में टैलेंट की कमी है, तो उन्होंने कहा, “कुछ खास स्किल्स ऐसी हैं जो हमारे पास नहीं हैं। आप किसी बेरोजगार व्यक्ति को नहीं कह सकते कि चलो, अब मिसाइल बनाना सीखो। इसके लिए अनुभव और ट्रेनिंग चाहिए।” ट्रंप ने स्वीकार किया कि विशेषज्ञता के बिना प्रमुख कठिन उद्योग आगे नहीं बढ़ सकते।
जॉर्जिया की फैक्ट्री का उदाहरण
ट्रंप ने जॉर्जिया की एक ह्युंडई बैटरी फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि जब दक्षिण कोरिया से आए कुशल मजदूरों को वापस भेजा गया, तो फैक्ट्री का उत्पादन ठप पड़ गया। उन्होंने बताया, “बैटरियां बनाना बेहद जटिल और खतरनाक काम है। कोरियाई मजदूर इसमें माहिर थे और अमेरिकी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहे थे। जब उन्हें भेजा गया, तो पूरी व्यवस्था बिगड़ गई।”
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नीति में बदलाव के संकेत
ट्रंप का यह बयान उनके पुराने रुख से बिल्कुल अलग माना जा रहा है। पहले वे विदेशी कामगारों के खिलाफ थे और कहते थे कि इससे अमेरिकी नौकरियां छिनती हैं। अब उन्होंने स्वीकार किया है कि कुछ क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करने में कई साल लगेंगे, इसलिए तब तक विदेशी विशेषज्ञों की मदद जरूरी है। यह बयान अमेरिका की इमिग्रेशन और वीजा नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।
