ग्लेशियर (सौजन्य सोशल मीडिया)
काराकास : जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनियाभर में गर्मी बढ़ रही है। इसके साथ ही बेमौसम भारी बारिश, पानी की कमी, आग लगने की घटनाएं और लोगों को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव दुनिया के ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो दुनिया के लिए बेहद डराने वाली है। दरअसल, वेनेजुएला में मौजूद सभी ग्लेशियर खत्म हो गए हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि कभी इस देश में छह ग्लेशियर हुआ करते थे जो अब लगभग पूरी तरह खत्म हो चुके है।
6 हिमनदियां थीं देश में
वेनेजुएला में मौजूद 5 ग्लेशियर पहले ही खत्म हो चुके थे, लेकिन आखिरी बचा ग्लेशियर भी समाप्त हो गया है। यह ग्लेशियर इतना सिकुड़ चुका है कि वैज्ञानिकों ने इसे बर्फ के मैदान के तौर पर वर्गीकृत किया है। अब वेनेजुएला में एक भी ग्लेशियर नहीं है। यह दुनिया का पहला ऐसा देश है, जहां जलवायु परिवर्तन के कारण सभी ग्लेशियर खत्म हो गए हैं।
0.4 % बचा है आखिरी ग्लेशियर का हिस्सा
लॉस एंडीज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जूलियो सीजर सेंटेनो ने बताया कि दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में अब एक भी ग्लेशियर नहीं है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ एक छोटा सा बर्फ का टुकड़ा है, जो अपने मूल आकार का सिर्फ 0.4 फीसदी बचा है। जलवायु वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि इंडोनेशिया, मैक्सिको और स्लोवेनिया के भी ग्लेशियर खत्म हो सकते हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन की वजह से पूरी दुनिया का औसत तापमान बढ़ रहा है और बर्फ पिघल रही है। इसके कारण दुनिया भर में समुद्र का जल स्तर भी बढ़ रहा है। डरहम विश्वविद्यालय के ग्लेशियोलॉजिस्ट कैरोलिन क्लासन ने कहा कि वेनेजुएला के आखिरी ग्लेशियर पर अधिक बर्फ नहीं जमी है। इस साल मार्च में लॉस एंडीज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने देखा कि यह ग्लेशियर अब सिर्फ दो हेक्टेयर में रह गया है, जो पहले 450 हेक्टेयर में फैला था।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्लेशियर के तौर पर योग्य होने के लिए बर्फ के एक टुकड़े के न्यूनतम आकार को लेकर कोई वैश्विक मानक नहीं है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक, आमतौर पर स्वीकृत दिशानिर्देश करीब 10 हेक्टेयर है। नासा ने साल 2018 में माना था कि यह वेनेजुएला का आखिरी ग्लेशियर है।
अगला नम्बर इंडोनेशिया, मैक्सिको और स्लोवेनिया का
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में ग्लेशियर पर खतरा मंडरा रहा है। अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं से तापमान बढ़ता है। बढ़ते तापमान की वजह से दुनिया भर में ग्लेशियरों के पिघलने की गति तेज हुई है। अब शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि कि इंडोनेशिया, मैक्सिको और स्लोवेनिया जैसे देशों में ग्लेशियर के खत्म होने का खतरा है।