ट्रंप के ऐलान के बाद बॉर्डर पर बढ़ा तनाव, भेजे 1500 अतिरिक्त सैनिक; एक्शन में अमेरिका
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान मेक्सिको सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाते हुए 5,000 से अधिक सैन्य कर्मियों को तैनात किया था। अब, वह फिर से ज्यादा सैनिकों की तैनाती करने की योजना बना रहे हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
बाॅडर और यूएस आर्मी, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद मेक्सिको, कनाडा और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप अवैध प्रवासियों और सीमा पर घुसपैठ को लेकर सख्त कदम उठा रहे हैं। ट्रंप ने आव्रजन से संबंधित एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए थे, और इसके दो दिन बाद, बुधवार को व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना मैक्सिको की सीमा पर 1,500 और सैनिक भेजेगी।
खबर के अनुसार, 500 मरीन, सेना के हेलीकॉप्टर चालक दल और खुफिया विशेषज्ञों सहित अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए हैं। ये नए सैनिक पहले से तैनात 2,200 सक्रिय ड्यूटी सैनिकों और हजारों नेशनल गार्ड के साथ मिलकर अपनी ड्यूटी निभाएंगे।
ट्रंप और बाइडन की एक सोच
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में मेक्सिको से लगी सीमा पर सैन्य बल की तैनाती बढ़ाकर 5,000 से अधिक सैनिक भेजे थे। इसके बाद, पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी इस सीमा पर सैनिकों की संख्या में इजाफा किया था। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, “ट्रंप के पहले दिन के आदेश के बाद, रक्षा विभाग ने सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए थे कि वे मातृभूमि की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाए रखें।”
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मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि 10 हजार सैनिकों को भेजने पर समय के साथ अनौपचारिक चर्चा हुई है। हालांकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि सैनिकों की संख्या अभी तक तय नहीं की गई है और यह विभिन्न पहलुओं पर निर्भर करेगी, जैसे कि यह सैन्य तैयारियों पर क्या असर डालेगा और होमलैंड सुरक्षा विभाग की आवश्यकताएँ क्या हैं।
राष्ट्रीय आपातकाल घोषित
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति पद के पहले दिन अवैध प्रवासन को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया। इसके तहत, अमेरिकी सेना को सीमा सुरक्षा में मदद करने, शरणार्थियों पर सख्त प्रतिबंध लगाने और अमेरिकी धरती पर जन्मे बच्चों को नागरिकता देने पर पाबंदी लगाने का आदेश दिया गया है। हालांकि, ट्रंप के इस फैसले का विरोध भी हो रहा है, लेकिन उनका कहना है कि “अमेरिका फर्स्ट” नीति को लागू करने के लिए ये कदम उठाना जरूरी था।
