इंटरव्यू में बोले ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi: होर्मुज जलमार्ग पर हमेशा मुस्तैद रहेगी हमारी तलवार
Abbas Araghchi Interview: ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका को चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब ईरान का नियंत्रण होगा और जहाजों से सर्विस फीस ली जाएगी। अमेरिका के साथ डील पर खुलासा।
- Written By: प्रिया सिंह
अब्बास अराघची इंटरव्यू (सोर्स-सोशल मीडिया)
Iran Deal Abbas Araghchi Interview: ईरानी विदेश मंत्री के इंटरव्यू में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर उनकी तलवार हमेशा तनी रहेगी। इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर अब ईरान और ओमान का पूरा नियंत्रण स्थापित होगा। यहां से गुजरने वाले सभी जहाजों से अब सर्विस फीस वसूली जाएगी।
अराघची ने अमेरिका के साथ चल रही सीक्रेट डील का राज भी पूरी तरह से खोल दिया है। उन्होंने बताया कि इस शुरुआती समझौते के तहत ईरान का कोई भी पैसा अब फ्रीज नहीं रह सकता। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका को अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हर हाल में हटाने की बात भी स्पष्ट रूप से कही है। देश की सुरक्षा सिर्फ खुदा, जनता और फौज पर टिकी है।
दो चरणों में होगी सीक्रेट डील
इस सीक्रेट समझौते की परतों को खोलते हुए अराघची ने बताया कि पूरी डील को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई है, इसे दूसरे चरण के लिए टाल दिया गया है। संवर्धित यूरेनियम को लेकर भी ईरान का रुख बिल्कुल साफ है और ताकत कम होने पर काम ईरान में ही होगा। किसी दूसरे देश में यूरेनियम से जुड़ा कोई भी काम नहीं किया जाएगा।
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हिजबुल्लाह का देंगे पूरा साथ
लेबनान के मोर्चे पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने साफ किया कि ईरान कभी भी हिजबुल्लाह को अकेला नहीं छोड़ेगा। युद्ध का खात्मा तभी माना जाएगा, जब सभी मोर्चों पर लड़ाई पूरी तरह से बंद हो जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज को लेकर चीन और ओमान जैसे दोस्तों के साथ मिलकर ट्रैफिक मैनेज करने की बात कही है। जहाजों को दी जाने वाली सेवाओं के बदले टैक्स नहीं बल्कि फीस ली जाएगी।
वादे तोड़ना अमेरिका की फितरत
इंटरव्यू के आखिर में अराघची ने अमेरिका की नीयत पर गहरा अविश्वास जताते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि वादे तोड़ना अमेरिकी नेताओं के स्वभाव में है, इसलिए समझौते को लागू करने में अड़चनें आ सकती हैं। ईरान ने अमेरिका की संभावित धोखेबाजी से बचने के सारे रास्ते पहले ही पूरी तरह बंद कर दिए हैं। अगर इस मसौदे की शर्तों को पूरा नहीं किया गया, तो फाइनल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर नहीं होंगे।
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सुप्रीम काउंसिल का अंतिम फैसला
इस शुरुआती समझौते पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में अभी भी कुछ मतभेद बने हुए हैं। कुछ लोग इसके भारी समर्थन में हैं, तो कुछ लगातार इस अहम फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। हालांकि, विदेश मंत्री ने साफ किया कि आखिरी फैसला किसी एक का नहीं बल्कि सबका मिलकर होगा। काउंसिल से हरी झंडी मिलते ही इस अहम समझौते को रिमोटली साइन कर दिया जाएगा।
