ममता दीदी को अब तक का सबसे बड़ा झटका! सुदीप बंदोपाध्याय हुए बागी तो भड़के कल्याण बनर्जी, कहा- चले गए तो चले गए

Sudip Bandyopadhyay Bhupender Yadav Meet: पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी के सांसदों की सेना अब टूटती जा रही है। सुदीप बंदोपाध्याय के बागी होने की खबरों ने अब टीएमसी में खलबली मचा दी है।
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ममता बनर्जी-सुदीप बंदोपाध्याय- कल्याण बनर्जी (IANS फाइल फोटो)
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Sudip Bandyopadhyay: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है। पार्टी के 19 सांसद पहले ही संभावित बागी नेताओं की सूची में शामिल माने जा रहे हैं, और अब एक और नाम इस सूची में जुड़ता दिख रहा है। TMC सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

खबरों के अनुसार, बागी सांसद शताब्दी रॉय भी सुदीप बंदोपाध्याय के साथ इस बैठक में शामिल थीं, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि, इन नेताओं के बीच हुई बातचीत का विवरण अभी सामने नहीं आया है, लेकिन यह ध्यान देने वाली बात है कि निशिकांत दुबे जिन पर पहले बागी विधायकों को धमकाने के आरोप लग चुके हैं, वे भी इस बैठक में मौजूद थे।

अगर सुदीप बंदोपाध्याय भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होते हैं, तो यह ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका होगा, खासकर तब जब पार्टी के 19 सांसदों के अलग होने की अटकलें पहले से ही चल रही हैं।

क्या सुदीप बंदोपाध्याय और TMC के बीच दूरियां बढ़ रही हैं?

गौरतलब है कि सुदीप बंदोपाध्याय को TMC का एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता माना जाता है। उन्हें अक्सर ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करते देखा जाता रहा है; हालांकि, अभिषेक बनर्जी के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण बताए जाते हैं। सुदीप और अभिषेक के बीच अक्सर वैचारिक मतभेद होने की बातें सामने आती रही हैं, हालांकि इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सुदीप बंदोपाध्याय और भूपेंद्र यादव की बैठक पर बोले कल्याण बनर्जी

TMC में अंदरूनी कलह पर पार्टी नेता कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि सुदीप बंदोपाध्याय पार्टी में रहे या न रहें। कल्याण बनर्जी ने कहा, "सुदीप-दा (सुदीप बंदोपाध्याय) चले गए तो चले गए। बहुत से लोग गए हैं, और सुदीप-दा भी चले गए। इससे क्या फर्क पड़ता है? कोई फर्क नहीं पड़ता। हालांकि, उन्हें चुनाव का सामना तो करना ही होगा, है ना? और जब वे ऐसा करेंगे, तो जनता उन्हें सबक सिखाएगी।

कल्याण बनर्जी ने आगे कहा कि सुदीप बंदोपाध्याय की सेहत ठीक नहीं थी। वे शायद ही कभी संसद जाते थे, बस वोट डालने की जरूरत होने पर ही जाते थे। आज देश की हालत देखिए। हमारे लोकतंत्र में संसद और राज्य विधानसभाएं अहम भूमिका निभाती हैं, फिर भी लोकतंत्र को ही खत्म किया जा रहा है। चुनाव के बाद, एक पार्टी या समूह सरकार बनाता है जबकि दूसरा विपक्ष में बैठता है। विपक्ष की भूमिका क्या है?

विपक्ष की भूमिका बताते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा देश के लिए बोलना और सरकार की गलतियों को उजागर करना, सत्ताधारी प्रशासन के खिलाफ असहमति जताना, और मुश्किलों का सामना कर रहे आम लोगों की शिकायतों को सामने लाना। यही विपक्ष की मुख्य भूमिका है। यह सरकार की तारीफ करने के लिए नहीं है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह केंद्र सरकार में हैं, जबकि सुवेंदु अधिकारी और अन्य पश्चिम बंगाल में हैं। उनका एजेंडा क्या है? विपक्ष की जगह और संख्या को कम करना, ताकि वे खुद विपक्ष की जगह ले सकें।

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