बंगाल में अब नहीं मिलेगा मुस्लिमों को आरक्षण, सुवेंदु ने पलटा ममता का एक और फैसला, जानें अब किसे मिलेगा लाभ?
Suvendu Adhikari Cancels Muslim OBC Quota: सुवेंदु सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ममता सरकार द्वारा धर्म के आधार पर मुस्लिम OBC आरक्षण खत्म कर दिया और 2010 से पहले की OBC सूची बहाल किया।
- Written By: अमन मौर्या
सुवेंदु अधिकारी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
West Bengal OBC Reservation Policy Change: पश्चिम बंगाल सरकार ने पूर्व की ममता सरकार का एक और बड़ा फैसला पलट दिया। सीएम सुवेंदु अधिकारी ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि 2010 से पहले वाली ओबीसी सूची राज्य में अब लागू होगी। उसी फार्मूले पर राज्य में शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 7 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।
सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मंगलवार को धर्म के आधार पर बनाई गई OBC श्रेणियों को खत्म कर दिया। साथ ही 2010 से पहले ओबीसी सूची में शामिल 66 समुदायों के 7% आरक्षण को फिर से नियमित कर दिया।
7 प्रतिशत हुआ आरक्षण
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सरकार ने ओबीसी आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कुल आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। नई नीति के तहत अब यह आरक्षण केवल वास्तविक पिछड़े हिंदू समुदायों को दिया जाएगा, जो एससी और एसटी श्रेणी में शामिल नहीं हैं। इसके साथ ही मुस्लिम समुदायों को दिए जा रहे ओबीसी लाभ को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला लिया गया है।
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2010 के पहले की OBC सूची लागू
मंगलवार को जारी अधिसूचना में राज्य सरकार ने पूर्व की टीएमसी सरकार के आदेश को पलटते हुए वर्ष 2010 से पहले ओबीसी सूची में शामिल 66 समुदायों को नियमित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह फैसला कलकत्ता हाई कोर्ट की 22 मई 2024 की खंडपीठ के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। राज्य की नई सुवेंदु सरकार ने सुप्रीट कोर्ट से पूर्व सरकार द्वारा दी गई याचिका वापस ले ली।
OBC श्रेणी ए और बी खत्म
सरकार के मुताबिक, पहले ओबीसी कैटेगरी-ए के तहत 10 प्रतिशत और ओबीसी कैटेगरी-बी के तहत 7 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता था। अब दोनों श्रेणियों को समाप्त करते हुए कुल आरक्षण 7 प्रतिशत कर दिया गया है। राज्यपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 2010 से पहले ओबीसी सूची में शामिल 66 समुदाय अब सरकारी नौकरियों और सेवाओं में 7 प्रतिशत आरक्षण के पात्र होंगे।
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ये जातियां होंगी शामिल
इस सूची में कपाली, कुर्मी, नाई (नापित), तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा, देवांग समेत कई पारंपरिक हिंदू समुदाय शामिल हैं। पश्चिम बंगाल सरकार का दावा है कि नई नीति सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और अदालत के निर्देशों के अनुरूप लागू की गई है। जानकारों का मानना है कि सरकार के ओबीसी आरक्षण के इस फैसले बड़ा बदलाव आया है।
