हुंमायूं कबीर और ओवैसी, फोटो- नवभारत डिजाइन
West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए एक नया और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी हुमायूं कबीर की नवगठित ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJDUP) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी।
रविवार को हैदराबाद में हुई इस घोषणा के बाद अब 25 मार्च को कोलकाता में एक कंबाइंड प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसमें इस चुनावी समझौते की रूपरेखा पेश की जाएगी। यह गठबंधन राज्य की राजनीति में तीसरे एंगल के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है, जो मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रहे मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है।
हुमायूं कबीर की पार्टी ने राज्य की कुल 294 सीटों में से 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का लक्ष्य रखा है,। इस गठबंधन के तहत AIMIM के लगभग 8 सीटों पर चुनाव लड़ने की संभावना है। कबीर ने अब तक 18 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, जिसमें मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे महत्वपूर्ण जिलों की सीटें शामिल हैं।
खुद हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले की तीन सीटों- भगवानगोला, नौदा और राजीनगर- से चुनावी मैदान में उतरेंगे। कबीर का दावा है कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में उनका दल निर्णायक भूमिका निभाएगा, हालांकि उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे भविष्य में भाजपा या टीएमसी में से किसका समर्थन करेंगे।
हुमायूं कबीर तृणमूल कांग्रेस के सस्पेंडेड विधायक हैं। वे उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद‘ के नाम से एक मस्जिद बनवाने का ऐलान किया, जिसे लेकर हुए विवाद के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
कबीर का मानना है कि मस्जिद निर्माण एक भावनात्मक मुद्दा है जो चुनाव में राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह बड़ा दावा भी किया है कि यदि उनकी पार्टी सरकार बनाती है, तो राज्य को पहला मुस्लिम मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री मिल सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ओवैसी और कबीर का यह गठबंधन सीधे तौर पर अल्पसंख्यक मतदाताओं को लक्षित कर रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 27 प्रतिशत है, जिसका बड़ा हिस्सा पिछले कुछ वर्षों से ममता बनर्जी के पक्ष में रहा है।
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मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में अल्पसंख्यक वोटों की अच्छी-खासी तादाद है, जहां यह नया गठबंधन टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। यदि यह गठबंधन मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर कुछ प्रतिशत वोट भी हासिल करने में सफल रहता है, तो यह ममता बनर्जी के लिए चुनावी टेंशन बढ़ा सकता है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिए मतदान दो चरणों में- 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को संपन्न होगा। पहले चरण में 152 और दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस पूरे सियासी घमासान का अंतिम परिणाम 4 मई 2026 को मतगणना के बाद सामने आएगा।