बारुईपुर कांड पर सख्त हुए मुख्यमंत्री, 72 घंटे में मांगी रिपोर्ट; लिंचिंग में मारे गए युवक को बताया बेगुनाह
Baruipur Mob Lynching Case: पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में बच्ची की हत्या के बाद हुई मॉब लिंचिंग पर मुख्यमंत्री ने 72 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। जानिए पूरा मामला और अब तक की कार्रवाई।
- Written By: अनन्या तिवारी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (सोर्स-सोशल मीडिया)
West Bengal Baruipur Murder Case: पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन दोनों सक्रिय नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से पूरे मामले की 72 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और संकेत दिए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी।
जांच में लापरवाही नहीं सही जाएगी
दक्षिण 24 परगना में पीड़िता के परिवार से मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले की शुरुआती जानकारी ली है। यदि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस की ओर से कार्रवाई में थोड़ी भी देरी या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि कानून के पालन में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
लिंचिंग में मारे गए युवक को बताया निर्दोष
मुख्यमंत्री ने उस युवक का भी जिक्र किया, जिसकी घटना के बाद भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार इंद्रजीत मंडल निर्दोष थे और उन्हें भी न्याय मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने उनके परिवार से भी मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि इस मामले की भी निष्पक्ष जांच होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि पीड़िता के परिजन अब तक की जांच से संतुष्ट दिखाई दिए हैं।
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तोड़फोड़ करने वालों पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने बताया कि घटना के बाद हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले करीब 200 लोगों की पहचान कर ली गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून हाथ में लेने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक जांच एजेंसियों ने उन लोगों के खिलाफ भी सबूत जुटाए हैं, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक और कट्टरपंथी तत्वों ने हालात को भड़काने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि विशेष जांच एजेंसियां ऐसे लोगों की गतिविधियों और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर उकसाने वालों को भी चेतावनी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काने या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़िता के परिवार ने सुरजापुर इलाके में पुलिस चौकी बनाने की मांग की है, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अगले सप्ताह प्रस्तावित दौरे के दौरान नई पुलिस चौकी का उद्घाटन किया जा सकता है।
दोनों परिवारों से फिर करेंगे मुलाकात
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पीड़िता और लिंचिंग में मारे गए युवक, दोनों परिवारों के लिए मुआवजे और अन्य सहायता को लेकर सुझाव मिले हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक सप्ताह के भीतर दोनों परिवारों से दोबारा मुलाकात करेंगे और उसके बाद मुआवजे से जुड़ी घोषणा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने राज्यभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर उन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना था कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
हत्या के आरोपियों पर चलेगा मुकदमा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इंद्रजीत मंडल की भीड़ द्वारा की गई हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जाए।
जानिए क्या है पूरा मामला
पश्चिम बंगाल के बारुईपुर (सूर्यपुर) में एक 11 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ कथित सामूहिक बलात्कार और जघन्य हत्या के बाद भारी बवाल हो गया। लापता बच्ची का शव तालाब में बोरे से बरामद हुआ, और पोस्टमार्टम में उसके साथ हुई बर्बरता की पुष्टि हुई। इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया और मुख्य संदिग्ध (इंद्रजीत मंडल) को खुद पकड़कर कानून अपने हाथ में ले लिया।
भीड़ की बेरहमी से पिटाई के कारण संदिग्ध की मौके पर ही मौत हो गई (मॉब लिंचिंग)। इस दोहरे हत्याकांड के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया, जिसके चलते सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया है।
