कोलकाता रेप एंड मर्डर केस: कोर्ट ने खारिज की संदीप घोष की जमानत याचिका, कहा- ऐसे मामलों में मौत..!
सीबीआई से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने कोलकाता स्थित आरजी कर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को जमानत देने से इनकार कर दिया और कहा कि उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।
- Written By: आकाश मसने
(डिजाइन फोटो)
कोलकाता: कोलकाता के चर्चित महिला जूनियर डॉक्टर रेप एंड मर्डर केस में सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। साथ प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के आरोप में पूर्व थाना प्रभारी अभिजीत मंडल को भी गिरफ्तार किया है। सीबीआई से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने दोनों की जमानत याचिका रद्द करते हुए गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पूर्व प्राचार्य के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं।
सीबीआई से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने कोलकाता स्थित आरजी कर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को जमानत देने से इनकार कर दिया और कहा कि उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं जिनके साबित होने पर फांसी की सजा तक हो सकती है।
बता दें कि सीबीआई ने नौ अगस्त को आ जी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर से कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में सबूतों से छेड़छाड़ और एफआईआर दर्ज करने में देरी के आरोप पर पूर्व प्राचार्य संदीप घोष व ताला पुलिस थाने के पूर्व प्रभारी अभिजीत मंडल को गिरफ्तार किया था।
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मृत्युदंड की सजा हो सकती है
अदालत ने 25 सितंबर को सुनाए गए अपने आदेश में कहा कि केस डायरी से ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच की प्रक्रिया जोरों पर है। संदीप घोष की जमानत याचिका को खारिज करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एस डे ने कहा कि घोष पर गंभीर प्रकृति आरोप के लगे हैं और यदि ये साबित हो जाते हैं तो इसमें मृत्युदंड की सजा हो सकती है, जो दुर्लभतम मामलों में दी जाती है।
न्यायाधीश ने कहा कि अदालत की राय है कि आरोपी को जमानत पर रिहा करना समता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा। उन्होंने आदेश में कहा कि एक व्यक्ति दूसरों की मदद से अपराध कर सकता है और अन्य आरोपियों को घटना स्थल पर मौजूद रहने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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अभिजीत मंडल की जमानत याचिका भी खारिज
कोर्ट ने पूर्व थाना प्रभारी अभिजीत मंडल की जमानत याचिका भी खारिज कर दी। इसने 30 सितंबर तक दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के सीबीआई के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के वकील ने यहां सियालदह अदालत में न्यायाधीश के समक्ष दावा किया कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके फंसाया गया था। साथ कहा था कि अपराध में उनकी कोई भूमिका नहीं है जैसा आरोप लगाया गया है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
