किसी को जलाया..तो किसी को बीच सड़क मारी गोली, बंगाल में सुवेंदु के PA से पहले इन नेताओं की हो चुकी है हत्या

Chandranath Rath Murder Case: West Bengal में सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या ने तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि, यह पहला मामला नहीं इससे पहले भी राज्य में कई राजनीतिक हत्याएं को चुकी है।
Chandranath Rath Murder
सुवेंदु अधिकारी के PA की हत्या से पश्चिम बंगाल में तनाव (सोर्स- सोशल मीडिया)
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West Bengal Political Murder and Violence History: पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक तनाव और हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को रात करीब 10 बजे भापजा के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा नेताओं ने इस घटना को राजनीतिक साजिश बताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

हालांकि, पश्चिम बंगाल में यह पहली राजनीतिक हत्या नहीं है। पिछले 5 साल में बंगाल में कई राजनीतिक हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी है। जिसने न सिर्फ राज्य में राजनीतिक माहौल को गरम किया बल्कि इससे आम जनता के मन में डर भर दिए। आइए आज हम आपको पश्चिम बंगाल में बिते कुछ सालों में हुई राजनीतिक हत्या के बारे में बताते हैं। जिन्होंने पूरे देश ध्यान बंगाल की ओर केंद्रित किया था।

चंद्रनाथ रथ

चंद्रनाथ रथ पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक थे। जिनकी बुधवार (6 मई 2026) को उत्तर 24 परगना क्षेत्र के मध्यमग्राम में गोली मार कर हत्या कर दी गई। जानकारी के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ बुधवार की रात को करीब 10 बजे अपनी कार से कुछ सामान खरीदने के लिए मार्केट गए थे। जहां अचानक कुछ अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में चंद्रनाथ की मौक पर ही मौत हो गई। जबकि उनके ड्राइवर को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

Chandranath Rath Murder Case
सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या (फाइल फोटो, सो- सोशल मीडिया)

चंद्रनाथ रथ की इस प्रकार हत्या से पूरे पश्चिम बंगाल में तनाव का माहौल है। बीजेपी नेता इसके लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं, टीएमसी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। चंद्रनाथ की हत्या को बड़ी राजनीतिक हत्या माना जा रहा है क्योंकि हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार बंगाल में बड़ी जीत दर्ज की है और सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।

भादू शेख

भादू शेख को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले टीएमसी के बड़े नेता के तौर पर जाना जाता था। बीरभूम के रामपुरहाट में पंचायत उप-प्रधान थे। जिनकी 21 मार्च 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। इससे पूरे इलाके में तनाव अपने चरम पर आ गया और हिंसा भड़क उठी। इस दौरान बोगतुई इलाके में कम से कम 10 लोगों को जिंदा जला दिया गया था। इस घटना से पूरे देश का ध्यान अचानक से पश्चिम बंगाल पर शिफ्ट हो गया था।

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टीएमसी नेता भादू शेख (फाइल फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया)

अनीस खान

अनीस खान पश्चिम बंगाल के बड़े छात्र नेता थे। 28 वर्षीय अनीस खान कोलकाता के आलिया विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र थे और एक सक्रिय छात्र कार्यकर्ता थे। 18-19 फरवरी 2022 की रात उनकी लाश विवादास्पद तरीके से मिली थी। अनीस इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) से जुड़े हुए थे। उनके परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस की वर्दी में कुछ लोग उनके घर आए और उन्हें तीसरी मंजिल की छत से धक्का दे दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस ने इससे इनकार किया। अनीस खान की मौत के बाद ISF ने पूरे पश्चिम बंगाल में सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किए थे।

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अनीस खान की हत्या के बाद छात्रों ने किया था विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो- सोर्स- सोशस मीडिया)

अर्जुन चौरसिया

27 वर्षीय अर्जुन चौरसिया पश्चिम बंगाल के काशीपुर के रहने वाले थे, अर्जुन चौरसिया लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के साथ लंबे समय से जुड़े थे। अर्जुन का शव मई 2022 को रहस्यमय हालत में मिला था। इससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। भाजपा ने हत्या का आरोप टीएमसी पर लगाया था। इस हत्या कांड़ के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद अर्जुन के घर गए थे और उन्होंने उनके परिवार से मिलकर इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया था।

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अर्जुन चौरसिया के परिजनों से मिलने गए थे अमित शाह (फाइल फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया)

इसके अलावा भी पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्या और उसके बाद हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती है। 2020 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया-2018’ रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्या और हिंसा के मामले में सबसे ऊपर था। 2018 में बंगाल में कुल 12 लोगों की हत्या राजनीतिक कारणों से हुई थी। वहीं, बिहार में ये संख्या नौ थी। जबकि महाराष्ट्र में सात लोगों की हत्या का कारण राजनीतिक था। जो दिखाता है कि बंगाल में राजनीतिक हत्याओं का ये सिलसिला नया नहीं है।

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