बंगाल चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, 34 लाख लोग नहीं डाल सकेंगे वोट; अंतरिम अधिकार देने से इनकार

Supreme Court: मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से तृणमूल कांग्रेस के नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने केस की पैरवी की। उन्होंने कहा कि कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं।
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सुप्रीम कोर्ट, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Supreme Court On West Bengal SIR:  पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय ने बंगाल के लाखों मतदाताओं को वोट डालने की अनुमति देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है, जिनका नाम स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू के दौरान वोटर लिस्ट से कट गया था। कोर्ट को बताया गया था कि 11 अप्रैल तक राज्य के मतदाता सूची से नामों को खारिज किए जाने या हटाए जाने के खिलाफ 34 लाख 35 हजार 174 अपीलें दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मतदाताओं को बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जाना चाहिए, खासकर तब जब 23 अप्रैल को मतदान होना निर्धारित है।

वोटर लिस्ट में संशोधन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम ऐसी स्थिति पैदा नहीं कर सकते जिससे अपीलीय ट्रिब्यूनल के जजों पर काम का बोझ बढ़ जाए। हमारे पास एक और याचिका भी है, जो इन अपीलों पर रोक लगाने की मांग करती है।

कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में रखा सरकार का पक्ष

अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से तृणमूल कांग्रेस के नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने केस की पैरवी की। उन्होंने कहा कि कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं, और उन्हें इस महीने के आखिर में होने वाले दो चरणों वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालने की इजाज़त दी जानी चाहिए।

इसके जवाब में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह तो बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है। अगर हम इसकी इजाजत देते हैं, तो इसमें शामिल लोगों के वोटिंग अधिकार रोकने पड़ेंगे।

'अदालत की राह देख रहे हैं बंगाल के लोग'

कल्याण बनर्जी ने कहा कि बंगाल के लोग न्याय के लिए इस अदालत की ओर देख रहे हैं। लोग अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहते हैं। 34 लाख लोग असली वोटर हैं, इसीलिए वे न्याय के लिए आपकी ओर देख रहे हैं। टीएमसी ने तर्क दिया कि उन सभी व्यक्तियों को मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए जिनके नाम 22 अप्रैल तक अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकार किए जाते हैं।

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