ममता का अभेद्य किला है ‘दक्षिण कोलकाता’: क्या 2026 में 7-0 का रिकॉर्ड बचा पाएगी टीएमसी या भाजपा लगाएगी सेंध?
WB Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही दक्षिण कोलकाता की 7 सीटों पर सियासी पारा बढ़ गया। TMC के सबसे मजबूत गढ़ में इस बार सत्ता और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
फोटो- नवभारत डिजाइन
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही दक्षिण कोलकाता की 7 सीटों पर सियासी सरगर्मी बढ़ गई। TMC के सबसे मजबूत गढ़ में इस बार सत्ता और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है और इस बार राज्य में केवल दो चरणों में वोटिंग होगी। चुनावी बिगुल बजते ही सभी की नजरें दक्षिण कोलकाता लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सात विधानसभा सीटों पर टिक गई हैं। यह इलाका लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का सबसे सुरक्षित और अभेद्य किला माना जाता रहा है, जहां वर्तमान में सभी सात सीटों पर टीएमसी का कब्जा है। हालांकि, पिछले कुछ चुनावों के रुझान बताते हैं कि भाजपा इस गढ़ में सेंध लगाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है।
भवानीपुर: मुख्यमंत्री का अपना घर और वफादार मतदाता
दक्षिण कोलकाता की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर है, जिसे आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के रूप में जाना जाता है। 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद से टीएमसी यहां कभी नहीं हारी है। चुनावी डेटा बताते हैं कि जब ममता बनर्जी खुद यहां से उम्मीदवार होती हैं, तो उन्हें मतदाताओं का भारी समर्थन मिलता है। हालांकि लोकसभा चुनावों में कभी-कभी भाजपा यहां कड़ी टक्कर देती है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी की लोकप्रियता के चलते यहां टीएमसी का पलड़ा भारी माना जा रहा है।
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बेहाला की दो सीटें: भ्रष्टाचार का साया और उत्तराधिकारी की तलाश
बेहाला क्षेत्र की दो सीटें- पूर्व और पश्चिम टीएमसी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही हैं। बेहाला पश्चिम सीट शुरुआत से ही टीएमसी का गढ़ रही है, जहां पार्थ चटर्जी लगातार जीतते रहे हैं। लेकिन शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्थ चटर्जी के लिए एक योग्य उत्तराधिकारी ढूंढने की है। यहां भाजपा मुख्य चैलेंजर के रूप में उभरी है। बेहाला पूर्व साल 2001 से टीएमसी का गढ़ बनी इस सीट पर रत्ना चटर्जी ने 2021 में बड़ी जीत हासिल की थी। हालांकि, भाजपा के बढ़ते वोट शेयर ने रूलिंग पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।
रासबिहारी और कसबा में भाजपा दे रही है सीधी चुनौती
दक्षिण कोलकाता के रासबिहारी सीट पर 1998 के उपचुनाव के बाद से ही टीएमसी का कब्जा रहा है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के समीकरणों ने टीएमसी को अलर्ट कर दिया है, क्योंकि वहां भाजपा ने अपनी पकड़ काफी मजबूत की है, जिससे 2026 का मुकाबला बेहद करीबी होने की संभावना है। वहीं कसबा विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा विधायक जावेद अहमद खान पिछले तीन चुनावों से अजेय रहे हैं, लेकिन यहां भी भाजपा ही मुख्य विपक्षी दल के रूप में मजबूती से खड़ी है।
टीएमसी का ‘पावरहाउस’ है कोलकाता पोर्ट और बालिगंज
कोलकाता पोर्ट: 2011 से यहां ममता कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हकीम का दबदबा है। उन्होंने पिछले तीन चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों को बड़े अंतर से हराया है और 2026 में भी अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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बालिगंज: कोलकाता के सबसे पॉश इलाकों में शुमार बालिगंज में 2006 के बाद से टीएमसी को कोई नहीं हरा पाया है। सुब्रत मुखर्जी के निधन के बाद हुए उपचुनाव में बाबुल सुप्रियो ने यहां जीत हासिल की थी। वर्तमान में भाजपा और वाम-कांग्रेस गठबंधन यहां टीएमसी के प्रभुत्व को चुनौती देने की स्थिति में नजर नहीं आ रहे हैं।
