आरजी कर केस: कलकत्ता हाई कोर्ट ने मांगी केस डायरी, आज मामले पर सुनवाई
RG Kar Case: बीते 24 मार्च को कलकत्ता HC ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया कि एजेंसी आरजी कर केस ‘केस डायरी' पेश करे। वहीं इस बाबत आज 28 मार्च को सुनवाई का दौरान ‘केस डायरी' पेश करने का भी निर्देश दिया ह
- Written By: राहुल गोस्वामी
प्रदर्शनकारी डॉक्टर्स (सोर्स-सोशल मीडिया)
कोलकाता: जहां एक तरफ बीते 24 मार्च सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया कि एजेंसी आरजी कर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात प्रशिक्षु महिला चिकित्सक से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले की जांच से संबंधित ‘केस डायरी’ अगली सुनवाई पर पेश करे। वहीं इस बाबत आज यानी 28 मार्च को सुनवाई का दौरान ‘केस डायरी’ पेश करने का भी निर्देश दिया है।
बीते 24 मार्च सोमवार को हाई कोर्ट ने पूछा था कि क्या केंद्रीय एजेंसी अपनी जांच में सामूहिक दुष्कर्म या सबूतों को नष्ट करने की आशंका पर विचार कर रही है। मृतक महिला चिकित्सक के माता-पिता (याचिकाकर्ता) ने अदालत की निगरानी में जांच की मांग की ती। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि अधीनस्थ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल करते समय CBI ने अपराध में बड़ी साजिश होने की बात कही थी, जिसके बाद उन्होंने मामले की जांच का अनुरोध किया था।
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इस बाबत जस्टीस तीर्थंकर घोष ने निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ताओं के अनुरोध पर जांच के वर्तमान चरण और CBI द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली स्थिति रिपोर्ट के अधीन विचार किया जाएगा। उन्होंने CBI को अगली सुनवाई की तारीख आज यानी 28 मार्च को ‘केस डायरी’ पेश करने का भी निर्देश दिया।
वहीं जस्टीस घोष ने इसके अलावा CBI के वकील से अदालत को यह भी बताने को कहा था कि क्या एजेंसी अपनी आगे की जांच में सामूहिक दुष्कर्म या सबूतों को नष्ट करने की आशंका की जांच कर रही है। जानकारी दें कि, महिला चिकित्सक का शव नौ अगस्त 2024 को उत्तर कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल के सेमिनार रूम में मिला था। उच्च न्यायालय ने कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
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जानकारी दें कि, बीते 25 मार्च सोमवार को कोलकाता के एक मनोचिकित्सक ने दावा किया था कि आरजी कर अस्पताल में बलात्कार एवं हत्या के मामले की पीड़िता विभिन्न कारणों से गंभीर मानसिक तनाव में थी और उसने पिछले साल नौ अगस्त को अपनी मौत से करीब एक महीने पहले पेशेवर मदद मांगी थी। मनोचिकित्सक मोहित रणदीप ने दावा किया था कि लंबे समय तक ड्यूटी, ‘शिफ्ट’ के आवंटन में भेदभाव और सरकारी अस्पताल में ‘‘अनियमितताओं के बारे में जानकारी” से 30 वर्षीय चिकित्सक मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान थी।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
