Bengal Election 2026: कभी शुभेंदु के खासमखास रहे पवित्र कर अब ठोकेंगे उनके खिलाफ ताल, ढहा पाएंगे BJP का किला?
West Bengal Election में नंदीग्राम एक बार फिर सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा बन गया। कभी शुभेंदु अधिकारी के साथी रहे पवित्र कर अब TMC के टिकट पर उन्हें चुनौती देंगे। जानें पवित्र ने इसे लेकर क्या दावा किया है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
अभिषेक बनर्जी और पवित्र कर, फोटो- सोशल मीडिया
West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि सत्ता के संघर्ष का वह प्रतीक है जिसने बंगाल की किस्मत लिखी है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यहां की सियासी बिसात पर मोहरे तेजी से बदले जा रहे हैं। सबसे ताजा और चौंकाने वाला घटनाक्रम मंगलवार को तब सामने आया जब भाजपा के कद्दावर स्थानीय नेता पवित्र कर ने अचानक पाला बदलकर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया।
यह खबर केवल एक दलबदल नहीं है, बल्कि उस नंदीग्राम के भविष्य की नई पटकथा है जहां इस बार मुकाबला ‘अपनों’ के ही बीच होने जा रहा है। क्योंकि जो चेहरा कल तक भाजपा का झंडा बुलंद कर रहा था, वही आज ममता बनर्जी के ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे के साथ मैदान में है।
कल तक जो साथी थे, आज आमने-सामने हैं
नंदीग्राम की सियासत में पवित्र कर का नाम कोई नया नहीं है। वह इस इलाके के एक मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं और उनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के साथ ही भाजपा का रुख किया था। लेकिन अब वक्त बदल चुका है।
टीएमसी ने नंदीग्राम से प्रत्याशियों की घोषणा करते हुए पवित्र कर को सीधे शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में उतार दिया है। पवित्र कर का मानना है कि नंदीग्राम के नतीजे इस बार तृणमूल के पक्ष में होंगे और उन्होंने यहां से 30,000 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज करने का बड़ा दावा किया है।
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आखिर क्यों पवित्र कर ने छोड़ा भाजपा का साथ?
पवित्र कर की टीएमसी में वापसी किसी सामान्य कार्यक्रम की तरह नहीं, बल्कि एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में हुई। उन्होंने मंगलवार को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी बदलने के पीछे उन्होंने भाजपा की ‘जनविरोधी नीतियों’ को मुख्य कारण बताया है। टीएमसी का कहना है कि पवित्र कर लंबे समय से भाजपा की कार्यशैली से असंतुष्ट चल रहे थे।
यह कदम न केवल भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह टीएमसी की उस रणनीति का हिस्सा भी है जिसके तहत वह भाजपा के ही पुराने योद्धाओं को हथियार बनाकर उन्हें चुनौती दे रही है। पवित्र कर ने जोश में कहा कि 4 मई को मतगणना के दिन, वे अपनी जीत के बाद ‘हरे रंग’ के साथ जश्न मनाएंगे।
नंदीग्राम के दो ब्लॉक और वोटों का गणित
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र दो हिस्सों यानी नंदीग्राम-1 और नंदीग्राम-2 ब्लॉक में बंटा हुआ है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नंदीग्राम-2 ब्लॉक में भाजपा की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती रही है और पवित्र कर इसी ब्लॉक के स्थायी निवासी हैं। उनकी स्थानीय लोकप्रियता और जाना-पहचाना चेहरा होना टीएमसी के लिए एक बड़ी बढ़त साबित हो सकता है। साल 2018 में जब वह बोयाल क्षेत्र के दो गांवों के प्रधान थे, तब भी उनकी क्षेत्र में गहरी पैठ थी।
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हालांकि, यह स्थिति काफी पेचीदा है क्योंकि उनकी पत्नी ने 2023 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता था और वह अब भी भाजपा की ही प्रमुख हैं। ऐसे में एक ही परिवार के अलग-अलग विचारधाराओं में होने का असर आम जनता के वोटों पर क्या पड़ेगा, यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
क्या कहता है नंदीग्राम का इतिहास?
यह मुकाबला केवल पवित्र कर और शुभेंदु अधिकारी के बीच नहीं है, बल्कि यह 2021 के उस जख्म को भरने की भी कोशिश है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम में शुभेंदु के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। उस हार के बाद ममता बनर्जी को भवानीपुर उपचुनाव जीतकर अपनी कुर्सी बचानी पड़ी थी।
इस बार भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को न केवल नंदीग्राम बल्कि कोलकाता की भवानीपुर सीट से भी मैदान में उतारा है, जहां उनका मुकाबला फिर से ममता बनर्जी से होगा। यानी शुभेंदु दो मोर्चों पर लड़ रहे हैं और नंदीग्राम में उनके खिलाफ उन्हीं के पुराने साथी को खड़ा करके टीएमसी ने मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने की कोशिश की है।
