TMC को बड़ा झटका: ज्योतिप्रिय मलिक ने राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने के 7 दिन बाद दिया इस्तीफा

West Bengal Politics: टीएमसी नेता ज्योतिप्रिय मलिक ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। वह हाल ही में राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल हुए थे।
Major blow to TMC: Jyotipriya Mallick resigns 7 days after joining the National Working Committee
ज्योतिप्रिया मल्लिक(सोर्स-सोशल मीडिया)
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Jyotipriya Mallick Resignation: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। खास बात यह है कि उन्हें महज एक सप्ताह पहले ही टीएमसी की राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया था, लेकिन सात दिन के भीतर ही उन्होंने सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया। मलिक ने अपने फैसले के पीछे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को वजह बताया है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से डायबिटीज से पीड़ित होने के कारण उनकी किडनी भी प्रभावित हुई है और डॉक्टरों ने उन्हें सक्रिय संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी है। राशन वितरण घोटाले के मामले में गिरफ्तारी और लंबे समय तक हिरासत में रहने के बाद यह उनका एक और बड़ा राजनीतिक फैसला माना जा रहा है

खराब सेहत के चलते संगठन से बनाई दूरी

ज्योतिप्रिय मलिक ने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बताते हुए उन्होंने कहा, "मैं लंबे समय से हाई ब्लड शुगर का मरीज हूं। डायबिटीज की वजह से मेरी किडनी भी प्रभावित हो चुकी है। ऐसे में डॉक्टरों के अनुसार मेरे लिए पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़े रहना संभव नहीं है। इसी कारण मैंने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया है।"

विधानसभा चुनाव में मिली हार

ज्योतिप्रिय मलिक पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक बड़ा नाम रहे हैं। वह 2001 से 2011 तक उत्तर 24 परगना जिले की गैघाटा विधानसभा सीट से लगातार विधायक रहे। इसके बाद 2011 से 2026 तक उन्होंने हाबरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार देबदास मंडल से हार का सामना करना पड़ा।

राशन घोटाले में ईडी ने किया था गिरफ्तार

ज्योतिप्रिय मलिक का नाम अक्टूबर 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब ईडी ने उन्हें पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित करोड़ों रुपए के राशन वितरण घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय वह राज्य के वन मंत्री थे। इससे पहले वह खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे।

एक साल बाद मिली थी जमामत

गिरफ्तारी के बाद उन्होंने एक साल से अधिक समय पहले ईडी और फिर न्यायिक हिरासत में बिताया। जनवरी 2025 में उन्हें जमानत मिली थी। जमानत के बाद वह सत्तारूढ़ दल के विधायक तो बने रहे, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई

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