80 साल उनका ही विकास हुआ…अल्पसंख्यकों पर दिलीप घोष के बिगड़े बोल, बताया ‘क्रिमिनल’
Dilip Ghosh Statement: बंगाल में भाजपा की जीत के बाद दिलीप घोष ने अल्पसंख्यकों पर विवादित टिप्पणी की है। आइए जानते हैं बिना अल्पसंख्यक विधायक के नई सरकार में मंत्रालय के पास क्या विकल्प हैं।
- Written By: अर्पित शुक्ला
दिलीप घोष (Image- Social Media)
Dilip Ghosh on Minority: पश्चिम बंगाल में BJP पहली बार अपनी सरकार बनाने जा रही है। भाजपा ने राज्य में 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। BJP के जीते हुए विधायकों में कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय से नहीं है। भाजपा के सीनियर नेता दिलीप घोष से जब इसको लेकर सवाल किया गया कि बंगाल में बीजेपी की नई सरकार में अल्पसंख्यक मामलों से जुड़ा मंत्रालय किसे मिलेगा? इस पर उन्होंने जवाब नहीं दिया, लेकिन अल्पसंख्यकों को ‘क्रिमिनल’ करार दे दिया है।
मीडिया से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि अल्पसंख्यकों का विकास हुआ है और उनका अलग से विकास नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा, “हम तो सबका साथ सबका विकास करते हैं और बीते 80 सालों से अल्पसंख्यकों का ही विकास हुआ है। फिर भी वो गरीब हैं, वो अशिक्षित हैं, क्रिमिनल हैं, क्यों?”
दिलीप घोष ने क्या कहा?
भाजपा नेता ने कहा कि अब उन लोगों को खुदसे सवाल पूछना चाहिए और उन पार्टियों से पूछना चाहिए। भाजपा की कोई जिम्मेदारी नहीं है अल्पसंख्यकों का विकास करने की। वो लोग हमें वोट भी नहीं देते। हां घर और सुविधाएं मिलेंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी दिया है अब भी देंगे।
सम्बंधित ख़बरें
रिपोर्ट का इंतजार करें… प्रशांत किशोर की चेतावनी पर मंत्री मिथिलेश का पलटवार; बोले- कानून का करें सम्मान
बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला, पटना-नवादा समेत इन 5 जिलों को मिली नई यूनिवर्सिटी की सौगात; देखें पूरी लिस्ट
यह सिर्फ ट्रैवल डॉक्यूमेंट है… पासपोर्ट पर MEA का बड़ा बयान, बोले- नहीं माना जाएगा नागरिकता का प्रमाण
ठाणे: बॉटल नेक फ्लाईओवर पर फिर छिड़ा सियासी संग्राम, नरेंद्र मेहता ने मंत्री सरनाईक को कहा- डबल रोल नहीं चलेगा
बता दें कि इससे पहले दिलीप घोष ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका हिसाब’ वाला नारा दिया था। एक इंटरव्यू में उन्होंने कई मामलों पर बात की और नई सरकार के एजेंडे पर बात करते हुए घोष ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास का रास्ता अपनाया जाएगा. लेकिन नई बात होगी सबका हिसाब,जिसमें कानून अपना काम करेगा।
कौन बनेगा अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री?
भाजपा के जीते हुए विधायकों में कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय का चेहरा नहीं है। ऐसी स्थिति में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय (Minority Affairs) के लिए सरकार के पास तीन विकल्प हैं।पहला मुख्यमंत्री अपनी पसंद के किसी भी हिंदू नेता को इस विभाग का मंत्री बना सकते हैं। इससे पहले भी कई राज्यों और केंद्र सरकार में भी गैर-अल्पसंख्यक नेताओं को ये जिम्मेदारी दी गई है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में वर्तमान में ओम प्रकाश राजभर (सुभासपा प्रमुख) अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हैं।
यह भी पढ़ें- ‘जायंट किलर’ से जमीनी पकड़ तक…वो 5 कारण, जिससे सुवेंदु बने बंगाल के ‘अधिकारी’
वहीं, BJP ने अपने प्रस्ताव में पश्चिम बंगाल में ‘विधान परिषद’ के गठन का वादा किया है। अगर ये परिषद बनती है, तो फिर पार्टी किसी मुस्लिम चेहरे को मनोनीत कर उसको मंत्री बना सकती है।
