‘I-PAC ने बंगाल सरकार में किया घुसपैठ’, शुभेंदु अधिकारी ने अश्विनी वैष्णव से लगाई जांच की गुहार
Bengal Political News: पश्चिम बंगाल सरकार पर सुभेंदु अधिकारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के संचार विभाग में I-PAC अनाधिकृत रूप से दखल दे रही है।
- Written By: Saurabh Pal
सुभेंदु अधिकारी (फोटो-शोसल मीडिया)
West Bengal: पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीति गरमायी हुई है। भाजपा और टीएमसी में जबरदस्त जुबानी जंग चल रही है। अब भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया एक्स के माध्यम से बंगाल की टीएमसी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल प्रशासन और आई पैक के बीच कथित गठजोड़ की तत्काल जांच की मांग उठाई है।
अधिकारी का दावा है कि 8 अगस्त को उनकी पिछली पोस्ट में बताए गए सबूतों से पता चलता है कि आई-पैक, जो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए काम करने वाली निजी परामर्श फर्म है, राज्य सरकार और प्रशासन में घुसपैठ कर चुकी है।
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में आई पैक ने टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति बनाई थी। उस समय टीएमसी के मुखिया के रूप में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर काम कर रहे थे। हालांकि चुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर ने आई पैक से किनारा कर लिया था। लेकिन आई पैक सरकार के लिए काम कर रही थी। मौजूदा समय में आईपैक बंगाल सरकार के लिए काम कर रही है या नहीं ये स्पष्ट नहीं है।
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IAS अधिकारियों को निर्देश दे रहे I-PAC के अधिकारी
शुभेंदु का कहना है कि आई-पैक के लोग पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अधिकारियों और आईएएस अधिकारियों को भी निर्देश दे रहे हैं, जो सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर मामला है। यह न सिर्फ राजनीति और जनसेवा की सीमाओं को मिटा रहा है, बल्कि राज्य के खजाने को टीएमसी के अभियान के लिए इस्तेमाल करने का खतरा भी पैदा कर रहा है। अधिकारी ने इसे वित्तीय घोटाला और पश्चिम बंगाल के हर नागरिक के साथ विश्वासघात करार दिया है। उनका आरोप है कि यह गठजोड़ लोकतंत्र के लिए खतरा बन गया है।
‘सरकार के संचार में अनाधिकृत रूप से दखल’
अधिकारी ने मंत्री से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के जरिए गहन जांच की मांग की है। वे चाहते हैं कि इस जांच में यह पता चले कि क्या आई-पैक ने सरकार के संचार में अनधिकृत रूप से दखल दिया, राज्य के आईटी संसाधनों का गलत इस्तेमाल हुआ, डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ, या सार्वजनिक धन से आई-पैक को अवैध भुगतान किया गया। उनका कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम में फैली गहरी भ्रष्टाचार की जड़ है। अधिकारी ने वादा किया कि वे इस मुद्दे पर लड़ाई जारी रखेंगे और जनता के हक के लिए आवाज उठाएंगे।
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तीन दोस्तों ने बनाई थी I-PAC
दरअसल, आई-पैक यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो मूलत: राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के लिए रणनीति तैयार करती है। इसके लिए कंपनी के कई विंग यानी विभाग हैं। पॉलिटिकल स्ट्रेटजिस्ट प्रशांत किशोर ने वर्ष 2013 में अपने तीन साथियों प्रतीक जैन, ऋषिराज सिंह और विनेश चंदेल के साथ मिलकर सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गर्वनेंस बनाया था, जो बाद में आई-पैक में बदल गया।- एजेंसी इनपुट के साथ
