
राहुल गांधी और खड़गे। इमेज-सोशल मीडिया
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अस्तित्व संकट से जूझ रही। एक ओर पार्टी का लगातार जनाधार घट रहा है, दूसरी ओर कई पुराने सहयोगी कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से हिचक रहे। बिहार में कांग्रेस और राजद गठबंधन में संभावित दरार के बीच अब एक और मोर्चे पर कांग्रेस को झटका लग सकता है। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट और कांग्रेस अलग चुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पश्चिम बंगाल का दौरा कर चुके हैं। गृह मंत्री अमित शाह भी वहां जा चुके हैं। ममता बनर्जी फ्रंट फुट पर चुनावी मैदान में हैं। वहीं, कांग्रेस और वाम दलों में मंथन ही चल रहा। बंगाल चुनाव को लेकर अब तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कोई बयान नहीं दिया गया है। पार्टी की उदासीनता अब भी चुनाव को लेकर बनी है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक है। मार्च से अप्रैल के बीच चुनाव हो सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच 2021 से चुनावी मुकाबले हो रहे हैं। लोकसभा चुनावों में भी दोनों के बीच ही मुख्य लड़ाई रही। कांग्रेस का प्रतिनिधित्व 2011 के बाद से लगातार कम हो रहा है।
इस चुनाव में भी भाजपा और टीएमसी की सीधी जंग है। इस जंग में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और कांग्रेस दोनों कमजोर हो रहीं। गठबंधन करने और न करने की अटकलें लग रहीं हैं। सीपीआई (एम) की केंद्रीय समिति ने जनवरी में तिरुवनंतपुरम में बैठक की थी। दोनों दलों ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा को हराने के लिए वे कांग्रेस के साथ समझौता कर सकते हैं। ये अलग बात है कि न कांग्रेस, न वाम दल गठबंधन की कवायद शुरू कर रहे हैं। जबकि चुनाव में 3 महीने से कम वक्त है।
ममता बनर्जी का कैडर बेस बहुत मजबूत है। वहीं, इस प्रदेश में भाजपा ने 2016 की तुलना में अप्रत्याशित बढ़त हासिल की है। विपक्षी वोट तभी नहीं बिखरेगा, जब लेफ्ट और कांग्रेस मिलकर भाजपा और टीएमसी को चुनौती दें। बंगाल में कुछ नेताओं का कहना है कि लेफ्ट के सारे मोर्चे और कांग्रेस को एक होना चाहिए। अब तक यह साफ नहीं है कि कांग्रेस और लेफ्ट का पश्चिम बंगाल में गठबंधन होगा। कांग्रेस अब तक इस गठबंधन पर हां नहीं कह रही।
2021 में लेफ्ट और कांग्रेस के बीच गठबंधन था। दोनों मिलकर एक सीट नहीं जीत सकी थीं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस प्रमुख सुभंकर सरकार का मानना है कि अकेले लड़ना बेहतर है। इससे पार्टी मजबूत स्थिति में आएगी। पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी भी अकेले चुनाव लड़ने की वकालत करते रहे हैं। एक तथ्य है कि दोनों दल अलग-अलग लड़े तो दो मजबूत पार्टियों के सामने वोटों का बिखराव और अधिक होगा। इससे भाजपा को फायदा हो सकता है। टीएमसी किसी से हाथ मिलाने के मिजाज में नहीं है।
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अप्रैल-मई में केरल में विधानसभा चुनाव होंगे। इसी समय पश्चिम बंगाल में भी चुनाव है। केरल में सीपीआई (एम) की एलडीएफ सरकार है। विपक्ष में कांग्रेस की यूडीएफ है। दोनों एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे। बंगाल में गठबंधन हुआ तो केरल में इसका असर पड़ सकता है। दोनों दल एक-दूसरे पर सियासी हमला बोलेंगे। ऐसे में भाजपा और दूसरी विपक्षी पार्टियों को मुद्दा मिल जाएगा।






