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केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को कोलकाता में विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई एक माइनिंग कंपनी से जुड़े बड़े बैंक फ्रॉड मामले को लेकर की गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित धोखाधड़ी से यूको बैंक को लगभग 7.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। CBI की यह कार्रवाई पूरी तरह सुनियोजित और समन्वय के साथ की गई। अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी का मकसद अहम दस्तावेजों और सबूतों को इकट्ठा करना है। इस केस में काफी समय से जांच चल रही थी। अब CBI ने जांच की रफ्तार बढ़ा दी है।
CBI की टीमें कोलकाता के न्यू अलीपुर क्षेत्र में एक कारोबारी के आवास पर पहुंचीं। इसके साथ ही न्यू टाउन इलाके में भी तलाशी अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने बताया कि ये सभी ठिकाने पहले से ही जांच के दायरे में थे। माना जा रहा है कि यहां से कंपनी से जुड़े अहम वित्तीय रिकॉर्ड हाथ लग सकते हैं। छापेमारी के दौरान इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। स्थानीय पुलिस भी मौके पर तैनात रही। पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी गई।
CBI की कुल पांच टीमों ने न्यू अलीपुर स्थित एक बहुमंजिला आवासीय परिसर में छापेमारी की। यह परिसर प्लॉट नंबर 28 पर मौजूद है। टीमें इमारत की पांचवीं मंजिल पर पहुंचीं और कई घंटों तक तलाशी ली। अधिकारियों ने फ्लैट में मौजूद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहराई से जांच की। यह छापेमारी काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसी स्थान से कंपनी के प्रमोटर्स के जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
CBI सूत्रों के मुताबिक, जिस परिसर में छापेमारी हुई वह स्वाति माइनिंग कंपनी के प्रमोटर्स और गारंटर अमित कुमार केजरीवाल और सरवन कुमार केजरीवाल से जुड़ा है। दोनों पर बैंक फ्रॉड मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि कर्ज की रकम कहां और किस तरह खर्च की गई। प्रमोटर्स की संपत्तियों और लेन-देन की भी जांच की जा रही है। इस कार्रवाई से नए खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह समन्वित ऑपरेशन जांच से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से किया गया है। एजेंसी बैंक स्टेटमेंट, लेजर, ईमेल और अन्य रिकॉर्ड खंगाल रही है। इन दस्तावेजों से फंड डायवर्जन का पूरा नेटवर्क उजागर हो सकता है। अधिकारी ने कहा कि जांच बेहद संवेदनशील है, इसलिए हर पहलू को बारीकी से परखा जा रहा है। CBI इस मामले में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में जुटी है।
CBI ने इस मामले में 30 दिसंबर 2025 को नया केस दर्ज किया था। यह एफआईआर यूको बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। केस में कंपनी, उसके निदेशक गिरिजा ठाकुर और सम्राट चक्रवर्ती को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा प्रमोटर और गारंटर अमित कुमार केजरीवाल और सरवन कुमार केजरीवाल के नाम भी शामिल हैं। बैंक का आरोप है कि कंपनी ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया, जिसके बाद CBI ने जांच शुरू की।
स्वाति माइनिंग कंपनी पहले से ही एक अन्य बैंक फ्रॉड मामले में CBI की जांच झेल रही है। यह केस बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज किया गया था। दोनों मामलों में आरोपों का पैटर्न काफी हद तक एक जैसा बताया जा रहा है। इससे एजेंसी को संदेह है कि यह एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला हो सकता है। CBI दोनों मामलों को जोड़कर जांच के नए एंगल तलाश रही है, जिससे कंपनी के पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सके।
यूको बैंक केस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने बैंक को 7.25 करोड़ रुपये का अनुचित नुकसान पहुंचाया। यह राशि 30 जून 2019 तक कंपनी के खाते में एनपीए के रूप में बकाया थी। बैंक का कहना है कि कंपनी ने कर्ज चुकाने की कोई ठोस मंशा नहीं दिखाई, जिसके चलते खाते को एनपीए घोषित करना पड़ा। CBI अब यह जांच कर रही है कि यह नुकसान किन हालात में हुआ और इसमें किसकी कितनी भूमिका है।
जांच में पता चला है कि यह कंपनी 2004 से यूको बैंक से अलग-अलग क्रेडिट सुविधाएं ले रही थी। कंपनी का कारोबार आयरन ओर और अन्य खनिजों के थोक व्यापार से जुड़ा हुआ था। बैंक ने कंपनी को वर्किंग कैपिटल सहित कई सुविधाएं प्रदान की थीं। शुरुआती वर्षों में खाते सामान्य बताए जाते हैं, लेकिन बाद में लेन-देन संदिग्ध होता गया। इसके बाद ही बैंक को गड़बड़ी का अंदेशा हुआ।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने वर्किंग कैपिटल सुविधा का दुरुपयोग किया। यह राशि जिस उद्देश्य के लिए स्वीकृत की गई थी, उसका इस्तेमाल उसी काम में नहीं किया गया। इसके बजाय पैसे को दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया गया। बैंक को इसकी जानकारी काफी देर से मिली। जब तक कार्रवाई की गई, तब तक बड़ा नुकसान हो चुका था। यही इस केस का मुख्य आधार बताया गया है।
CBI के अनुसार, कंपनी ने रकम को कुछ संड्री क्रेडिटर्स के नाम पर ट्रांसफर किया। जांच में सामने आया कि ये वास्तविक लेनदार नहीं थे, बल्कि केवल कागजों में दिखाए गए थे। इस तरीके से बैंक को गुमराह किया गया। एजेंसी अब इन फर्जी लेनदारों की पहचान कर रही है, ताकि पूरे फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
एफआईआर में यह भी आरोप है कि बड़ी रकम को ग्रुप कंपनियों या उनसे जुड़ी अन्य कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। ये कंपनियां सीधे या परोक्ष रूप से उसी उधारकर्ता से संबंधित थीं। CBI अब इन सभी कंपनियों के खातों की जांच कर रही है। फंड का अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ, यह पता लगाया जा रहा है। यही जांच का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
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CBI की इस कार्रवाई के दौरान केंद्रीय बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था किसी भी तरह की बाधा से बचने के लिए की गई। पूरी छापेमारी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। CBI ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में और भी ठिकानों पर कार्रवाई हो सकती है। इस केस में जल्द बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।