

Mamata Banerjee Bengal TMC Crisis News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के लिए इस समय बहुत ही भारी संकट की स्थिति पैदा हो गई है। पार्टी के अंदर एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक बगावत देखने को मिल रही है। सयानी घोष, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कई बड़े और दिग्गज सितारों ने बागी खेमे का साथ पकड़ लिया है। एक जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर बनी यह अहम पार्टी अब पूरी तरह से टूटने की कगार पर है।
पिछले 15 सालों से बंगाल पर एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी के हाथों से अब सत्ता फिसलती नजर आ रही है। टीएमसी के दिग्गज विधायक और सांसद एक-एक करके उनका साथ छोड़ रहे हैं। काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 19 बागी सांसदों ने अपना एक बिल्कुल अलग और नया गुट बना लिया है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि अब ममता बनर्जी के पास आखिर कितनी राजनीतिक ताकत बची हुई है।
024 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी ने राज्य की कुल 42 लोकसभा सीटों में से 29 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी। चुनाव के बाद बशीरहाट से टीएमसी सांसद हाजी नुरुल इस्लाम की दुखद मौत हो गई जिससे कुल 28 सांसद बचे। अब इन 28 में से 19 सांसद बागी हो गए हैं और ममता के पास सिर्फ 9 लोकसभा सांसद ही बचे हैं। इन बचे हुए 9 सांसदों में कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सुदीप बंधोपाध्याय प्रमुख रूप से शामिल हैं। काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले इस नए बागी गुट में पार्टी के कई बहुत बड़े और मशहूर नाम शामिल हैं। इनमें शत्रुघ्न सिन्हा, सयानी घोष, यूसुफ पठान, दीपक अधिकारी, रचना बनर्जी और जून मालिया जैसे प्रमुख चेहरे हैं। ये वो बड़े नाम हैं जिन्हें ममता बनर्जी ने खुद राजनीति में एक बहुत बड़ी और खास पहचान दिलाई थी। अब ये सभी बड़े नेता और सितारे बीजेपी खेमे के साथ खड़े होने के लिए पूरी तरह से बेताब नजर आ रहे हैं।
लोकसभा के अलावा उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी ममता बनर्जी की पार्टी को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। टीएमसी के कुल 13 राज्यसभा सांसद हैं जिनमें से दो बड़े सांसदों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने अपनी राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ टीएमसी से भी पूरी तरह इस्तीफा दे दिया है। अब टीएमसी के पास 11 राज्यसभा सांसद बचे हैं और उनका भी ममता के साथ टिके रहना काफी मुश्किल लग रहा है।
विधानसभा चुनाव में टीएमसी के टिकट पर कुल 80 विधायक जीतकर आए थे जिनमें से ऋतब्रत और संदीपन को बाहर कर दिया गया था। इसके बाद पार्टी के 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया और ऋतब्रत बनर्जी को अपना मुख्य नेता चुन लिया। अब ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि उनके पास कुल 64 विधायकों का समर्थन है जो जल्द 65 होने वाला है। इस तरह 80 में से 65 विधायक बागी हो गए हैं और ममता बनर्जी के पास सिर्फ 15 विधायक ही बचे हैं।