

TMC Crisis Saayoni Ghosh Rebel: पश्चिम बंगाल में विधायक दल में भारी बिखराव के बाद अब टीएमसी संसदीय दल में भी बहुत बड़ी टूट पूरी तरह से कन्फर्म हो गई है। टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर संसद में अलग बैठने की मांग की है। इस बागी गुट में मशहूर अभिनेत्री और सांसद सयानी घोष का नाम भी प्रमुख रूप से शामिल है। यह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से एक बहुत ही बड़ा झटका माना जा रहा है।
सयानी घोष ने भी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखे इस अहम पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं। सयानी घोष पश्चिम बंगाल की एक बहुत ही प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री, बेहतरीन गायिका और तृणमूल कांग्रेस की सांसद हैं। वह वर्तमान में जादवपुर संसदीय क्षेत्र का बहुत ही मजबूती से प्रतिनिधित्व करने वाली लोकसभा सांसद हैं। चुनाव हारने के बाद से ममता बनर्जी की पार्टी में यह सबसे बड़ी और ऐतिहासिक बगावत मानी जा रही है।
बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सयानी घोष के एक गाने ने बहुत भारी राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने 'मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीना' गाना गाया था जिसके बाद उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने सयानी घोष के इस चर्चित गाने को लेकर ममता बनर्जी को अपने तीखे निशाने पर लिया था। उस समय बीजेपी ने ममता बनर्जी की सरकार पर मुस्लिम तुष्टीकरण करने के बहुत ही गंभीर और सीधे आरोप लगाए थे। लेकिन राजनीति का खेल देखिए कि अब उसी बीजेपी और एनडीए को समर्थन करने का ऐलान टीएमसी के बागी सांसदों ने कर दिया है। इस चौंकाने वाले और बागी फैसले में विवादित गाना गाने वाली सांसद सयानी घोष भी पूरी तरह से शामिल हो गई हैं।
सयानी घोष ने पहले आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले राघव चड्ढा पर भी अपना तीखा निशाना साधा था। उन्होंने एक चुनावी जनसभा के दौरान राघव चड्ढा पर बहुत ही तीखा और बड़ा राजनीतिक तंज कसते हुए एक कड़ा बयान दिया था। सयानी ने कहा था कि मैं चड्ढा नहीं हूं जो 'चड्डी' बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा।
सयानी घोष के इस बहुत ही ज्यादा विवादित बयान पर बीजेपी ने अपनी सख्त और भारी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर की थी। लेकिन अब बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में सयानी घोष खुद बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ खड़ी नजर आ रही हैं। उनका यह नया और बहुत बड़ा राजनीतिक कदम पूरे बंगाल की राजनीति में भारी भूचाल लाने वाला साबित हो रहा है।
इस भारी टूट के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सामने अपना वजूद बचाने का बहुत बड़ा संकट आ खड़ा हुआ है। टीएमसी नेता सुष्मिता देव ने भी अपना बड़ा इस्तीफा दे दिया है जिससे पार्टी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं। अब यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी इस भारी संकट और बगावत का कैसे सामना करती हैं।