वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
Pir Mangho Dargah : किस्तान के कराची में स्थित मंघोपिर दरगाह इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। यहां एक झील है, जिसमें 200 से ज्यादा मगरमच्छ रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि श्रद्धालु इन मगरमच्छों को अपने हाथ से मीट, अंडे और मिठाई तक खिलाते हैं।
लोग मानते हैं कि ये मगरमच्छ पवित्र हैं और दरगाह की हिफाजत करते हैं। झील के किनारे खड़े होकर लोग दुआ मांगते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं। अगर मगरमच्छ खाना स्वीकार कर ले, तो इसे मुराद पूरी होने का संकेत माना जाता है।
यह दरगाह 13वीं सदी के सूफी संत से जुड़ी मानी जाती है। लोककथाओं के अनुसार, वे महान संत बाबा फरीद के शिष्य थे। मान्यता है कि बाबा फरीद के आशीर्वाद से उनकी जुओं से इस झील में मगरमच्छ पैदा हुए।
तभी से लोग इन्हें करामात मानते हैं। हर साल यहां शीदी मेला लगता है, जिसमें धम्माल और सूफी रस्में होती हैं। दूर-दूर से लोग फातिहा पढ़ने और मगरमच्छों को चढ़ावा देने आते हैं।
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कुछ इतिहासकारों का मानना है कि ये मार्श क्रोकोडाइल हैं, जो सदियों पहले बाढ़ के दौरान यहां आ गए होंगे। झील का गर्म पानी और गंधक वाले सोते इनके लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं।
वैज्ञानिक नजरिए से यह एक प्राकृतिक आवास है, लेकिन अकीदतमंद इसे चमत्कार मानते हैं। मंघोपिर दरगाह सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, सूफी संस्कृति और प्रकृति का अनोखा संगम है। यही रहस्य और आस्था इसे खास बनाते हैं।