
मैथिली ठाकुर
Book on Maithili Thakur: बिहार की अलीनगर विधानसभा सीट से विधायक और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर इन दिनों महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। रविवार को पुणे में उन्हें लेखक सुनील पांडे ने उनकी आत्मकथा भेंट की, जिसका शीर्षक है ‘लोकप्रिय युवा गायिका मैथिली ठाकुर’। किताब देखकर वह बहुत खुश हुईं और उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।” इसके साथ ही उन्होंने पुणे में स्थित दगड़ू सेठ के मंदिर में दर्शन भी किए।
मैथिली ठाकुर को लेखक सुनील पांडे द्वारा भेंट की गई यह किताब मैथिली ठाकुर पर लिखी गई है, जो मराठी भाषा में है। इस पर मैथिली ठाकुर ने “एक्स” पर वीडियो पोस्ट किया और लिखा, “सुनील पांडे जी द्वारा मराठी में मेरे ऊपर लिखी हुई पुस्तक देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। अपने मन की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं मिल पा रहे।”
मैथिली ठाकुर ने लेखक से कहा कि यह किताब मराठी में लिखी गई है और यह उनके लिए बहुत बड़ी बात है। इस पर सुनील पांडे ने कहा, “आप तमिल को उतना ही प्रेम करती हैं जितना मैथिली को, तो आप पर तो पूरे भारत का हक बनता है।” मैथिली ठाकुर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप सभी लोग जानते हैं कि मैं पुणे, महाराष्ट्र में आई हुई हूं। कोंढवा महोत्सव में योगेश अन्ना ने मुझे बुलाया है। उनके आमंत्रण पर मैं आज उनके शहर आई हूं। लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ा सरप्राइज यह था कि बिहार की एक लड़की, मिथिला की एक लड़की पर पहली किताब बनी है, जो महाराष्ट्र में मराठी में लिखी गई है।”
The first book about a Bihari girl is written in Marathi, in Maharashtra. Patriotism is rising beyond regional hatred and identifying as Bharatiya. 🇮🇳🇮🇳 pic.twitter.com/bbVtGwFkOv — Mona Shandilya (@RoseTint4) January 1, 2026
मैथिली ठाकुर ने यह भी कहा कि वह अब घोषणा करने वाली हैं कि उनका घर कोंढवा में होगा। उन्होंने पुणे में दगड़ू सेठ के पावन दर्शन भी किए और इस पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “पुणे में दगड़ू सेठ के पावन दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गणपति बप्पा मोरया।”
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इससे पहले, शुक्रवार को मैथिली ठाकुर ने फेसबुक पर एक पोस्ट में मराठी में संदेश दिया, “संतों की धरती पुणे, मुक्ता बाई की पावन भूमि पर आज मिला अपार स्नेह। कल आदरणीय अन्ना योगेश टिलेकर जी के जन्मदिन पर कोंढवा महोत्सव में मेरी संगीत प्रस्तुति होगी। आप सभी सादर आमंत्रित हैं। मिथिला का पाग और चादर, महाराष्ट्र की परंपरागत टोपी, पुणे की धरती पर संस्कृतियों का यह संगम ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करता है। पुणे की जनता का हृदय से आभार।”






