मुमताज के लिए ताजमहल बनाने वाले शाहजहां की कितनी बेगम थीं? जानें कौन थी सबसे पसंदीदा
मुगल सम्राट शाहजहां, जिन्हें उनकी प्रेम कहानी और ताजमहल के निर्माण के लिए याद किया जाता है, इतिहास के पन्नों में खास जगह रखते हैं।
- Written By: शिवानी मिश्रा
ताजमहल (कांसेप्ट फोटो सौ. सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क : मुगल सम्राट शाहजहां, जिन्हें उनकी प्रेम कहानी और ताजमहल के निर्माण के लिए याद किया जाता है, इतिहास के पन्नों में खास जगह रखते हैं। मुमताज महल के प्रति उनका अटूट प्रेम ताजमहल के रूप में अमर है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुमताज महल उनकी इकलौती पत्नी नहीं थीं? शाहजहां की कुल तीन पत्नियां थीं, और इतिहासकारों के अनुसार उनकी पसंदीदा पत्नी कोई और थी।
शाहजहां, जिनका असली नाम खुर्रम था, की पहली शादी 1612 में कंधारी बेगम से हुई थी। कंधारी बेगम फारस के शासक शाह इस्माइल की पोती थीं। राजनीतिक कारणों से हुआ यह विवाह शाहजहां की शक्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से हुआ था।
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मुमताज महल से प्यार
शाहजहां की पसंदीदा पत्नी
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शाहजहां की दूसरी पत्नी मुमताज महल थीं, जिनसे उनका प्रेम प्रसंग इतिहास में दर्ज है। मुमताज, जिनका असली नाम अरजुमंद बानो बेगम था, उनकी सबसे करीबी साथी थीं। मुमताज के साथ शाहजहां का रिश्ता भावनात्मक और गहरा था। उन्हें 14 बच्चों को जन्म देने के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी। मुमताज की याद में ही शाहजहां ने ताजमहल बनवाया, जो आज प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
कौन थीं शाहजहां की पसंदीदा पत्नी? और उनकी अहमियत
शाहजहां की तीसरी पत्नी थीं इस्लाम शाही बेगम, जो राजनीतिक समीकरणों का भी हिस्सा थीं। हालांकि उनके साथ शाहजहां का रिश्ता मुमताज जैसा नहीं था, लेकिन वो भी उनके हरम का अहम हिस्सा थीं। इतिहासकारों की राय में, मुमताज महल शाहजहां की सबसे प्रिय पत्नी थीं। उन्होंने मुमताज की याद में न केवल ताजमहल बनवाया, बल्कि उनके प्रति अपने गहरे प्रेम को बार-बार व्यक्त भी किया। उनकी मृत्यु के बाद शाहजहां ने खुद को उनकी यादों में खो दिया तथा अपने शासन का बड़ा हिस्सा गमगीन होकर बिताया।
शाहजहां का ताजमहल और उनकी विरासत
शाहजहां ने अपने प्यार और कला के प्रति लगाव को ताजमहल के रूप में अमर कर दिया। उनकी अन्य पत्नियां भी उनकी कहानी का हिस्सा थीं, लेकिन मुमताज महल ने उनके दिल में एक खास जगह बनाई थी। बता दें कि शाहजहां की ये कहानी प्रेम, राजनीति और परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। ताजमहल न सिर्फ उनकी स्थापत्य कला का प्रमाण है, बल्कि उनके दिल की भावनाओं का भी प्रतीक माना जाता है।
