
पाकिस्तान टू पेरिस कैसे पहुंचे नदीम (सौजन्य:- सोशल मीडिया)
पेरिस: पेरिस ओलंपिक 2024 में पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम ने अपना झंडा गाड़ दिया। उन्होंने भालाफेंक स्पर्धा में भारत के खिलाड़ी नीरज चोपड़ा को भी पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया है। उनकी इस जीत से ना केवल पाकिस्तान में खुशी की लहर है बल्कि अन्य देश के खिलाड़ी भी उनके जज्बों को सलाम कर रहे हैं।
किसी भी खेल में हार-जीत उसका आखिरी फैसला होता है लेकिन, उसके पीछे की मेहनत उस जीत की कहानी होती है और नदीम की कहानी काफी प्रेरणादायक है। उनके इस कहानी को जरूर भारत के लोग भी सलाम कर रहे होंगे।
एक छोटे से गांव में जन्म लेने वाले अरशद नदीम खुद भी नहीं सोच पाए होंगे की वो ओलंपिक में गोल्ड जीतेंगे। उन्होंने ना केवल पदक जीता बल्कि एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। उन्होंने बीजिंग ओलंपिक 2008 में एंड्रियास द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ते हुए जीत हासिल की है। एंड्रियास ने उस मैच में सबसे अधिक 90.57 मीटर भाला फेंककर रिकॉर्ड बनाया था। नदीम ने उनके भी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 92.97 मीटर का भाला फेक दिया है।
किस हालात और विपरीत परिस्थिति में नदीम ने यह मुक़ाम हासिल किया। ग़ज़ब है
pic.twitter.com/8odQ2X6uBM — Narendra Nath Mishra (@iamnarendranath) August 9, 2024
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बता दें कि नदीम के पिता मुहम्मद अशरफ पेशे से मजदूर हैं। कभी-कभी नदीम के घर का खर्च भी चलाना मुश्किल होता था। ऐसे में नदीम को सही ट्रेनिग देने और पेरिस भेजने के लिए पैसे जुटाना बिल्कुल नामुमकिन था। नदीम के सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता ने पूरे गांव से पैसे इक्ठा किए थे। गांव वालों ने चंदा के माध्यम से नदीम को ट्रेनिंग और ट्रैवल के पैसे दिए। आलम यह था कि पुराने भाले से ही काम चलाना पड़ता था। नए भाले खरीदने के लिए भी नदीम के पास पैसे नहीं थे। इस गरीबी को हराते हुए अरशद नदीम ने अपनी किस्मत बदल ली है।
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बता दें कि इससे पहले पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम ने टोक्यो 2020 ओलंपिक्स में 86.62 मीटर दूर तक भाला फेंका था। जिसमें उन्हें पांचवां स्थान मिला था। इससे पहले 2016 में उन्होंने गुवाहाटी में भारत में साउथ एशियन गेम्स में 78.33 मीटर दूर तक भाला फेक कर कांस्य पदक जीता था।
अरशद नदीम स्कूल के समय से ही खेल में अच्छे थे। बैडमिंटन, क्रिकेट समेत अन्य खेलों को खेलने के बाद उन्होंने जेवलिन थ्रो को अपना फाइनल डेस्टिनेशन चूना था। आज इस खेल ने नदीम का सपना भी पूरा कर दिया।






