तीसरी कोशिश में पास की 12वीं, पिता ने फेलियर को बनाया जश्न, स्टारबक्स स्टॉल वाली ग्रैंड पार्टी वायरल

Failure Success Story : तीसरी बार में 12वीं पास करने पर एक पिता ने बेटे की ‘फाइटिंग स्पिरिट’ का ऐसा जश्न मनाया कि तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए। पार्टी में स्टारबक्स स्टॉल तक लगाया गया।
After his son passed Class 12 on the third attempt, a father celebrated failure-turned-success with a grand party that went viral online.
वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
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12th Exam Result Viral : अक्सर समाज में फेलियर को शर्म और छिपाने की चीज़ माना जाता है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कहानी इस सोच को पूरी तरह पलट देती है। जब एक बेटे ने तीसरी कोशिश में 12वीं की परीक्षा पास की, तो उसके पिता ने इस सफलता को किसी आम जीत की तरह नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक पल की तरह मनाया।

बेटे ने तीसरी बार में 12वीं पास की, तो हुआ जश्न

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में दावा किया जा रहा है कि यह युवक दो बार 12वीं में फेल हो चुका था। आमतौर पर ऐसे मामलों में परिवार चुप्पी साध लेता है या बच्चों पर दबाव बढ़ा दिया जाता है, लेकिन इस पिता ने बिल्कुल उलटा रास्ता चुना। उनका मानना था कि बेटे का असली कमाल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि दो बार असफल होने के बाद भी हार न मानना था।

इसी सोच के साथ पिता ने बेटे की सफलता पर एक ग्रैंड पार्टी का आयोजन किया, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए। पार्टी की भव्यता ऐसी थी कि इसकी तुलना लोग आलीशान शादियों से करने लगे। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पार्टी में मेहमानों के लिए अलग-अलग तरह के फूड स्टॉल लगाए गए थे और सबसे ज्यादा चर्चा में रहा Starbucks का कॉफी स्टॉल।

फेलियर को नॉर्मलाइज करने की बेहतरीन मिसाल

सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि आज के समय में जहां लोग बच्चों के रिजल्ट को समाज के डर से छुपाते हैं, वहीं यह पिता अपने बेटे के संघर्ष को गर्व के साथ सेलिब्रेट करता दिख रहा है। कई लोगों ने इसे “फेलियर को नॉर्मलाइज करने” की बेहतरीन मिसाल बताया है।

हालांकि कुछ यूजर्स ने इस पार्टी को जरूरत से ज्यादा खर्चीला बताया, लेकिन ज्यादातर लोग पिता की सोच की तारीफ करते नजर आए। उनका कहना है कि यह जश्न नंबरों का नहीं, बल्कि हिम्मत, धैर्य और दोबारा उठ खड़े होने की ताकत का है।

इस वायरल कहानी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमें बच्चों की सिर्फ जीत नहीं, बल्कि उनकी कोशिशों और संघर्ष को भी उसी गर्व के साथ सेलिब्रेट नहीं करना चाहिए?

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