

Corporate Job Anxiety : स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद अक्सर लोगों को लगता है कि अब परीक्षा, होमवर्क और असाइनमेंट जैसी परेशानियां खत्म हो गई हैं। लेकिन बेंगलुरु की रहने वाली चारु गुप्ता की कहानी कुछ अलग है।
तीन साल से नौकरी कर रहीं चारु ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि कॉर्पोरेट लाइफ में उन्हें आज भी ऐसा महसूस होता है जैसे वह स्कूल में हों और उनकी परीक्षाएं चल रही हों।
उनका कहना है कि हर सोमवार ऑफिस जाते समय ऐसा लगता है कि एक नया एग्जाम शुरू हो गया है और बस किसी तरह आज का दिन निकल जाए। इसके बाद अगले दिन के लिए बेहतर तैयारी करने का ख्याल मन में चलता रहता है।
चारु ने बताया कि ऑफिस का पेंडिंग काम उन्हें स्कूल के होमवर्क और असाइनमेंट जैसा महसूस होता है। काम खत्म होने के बाद घर पहुंचने पर भी लैपटॉप में बचा हुआ काम दिमाग में चलता रहता है। खासकर वीकेंड पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
शनिवार को उन्हें लगता है कि बहुत सारा काम बाकी है, इसलिए कहीं बाहर जाने या कोई प्लान बनाने का मन नहीं करता। लेकिन दूसरी तरफ वह तुरंत उस काम को पूरा भी नहीं करतीं। ऐसे में पूरा वीकेंड काम करने की चिंता और उसे टालने के बीच निकल जाता है। रविवार रात तक तनाव बना रहता है और जब सोमवार नजदीक आ जाता है, तब वह जरूरी काम पूरा करने बैठती हैं।
चारु ने मजाकिया अंदाज में अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि उन्हें रविवार रात तक ऐसा लगता रहता है कि अब किसी तरह कल के एग्जाम में पास होना है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई यूजर्स ने उनकी बात को अपनी जिंदगी से जोड़कर देखा। लोगों ने कहा कि कॉर्पोरेट नौकरी में स्कूल की परीक्षा की जगह डेडलाइन, मीटिंग, टारगेट और परफॉर्मेंस रिव्यू ने ले लिया है।
वहीं होमवर्क की जगह पेंडिंग ईमेल और ऑफिस का काम आ गया है। चारु की बात ने खासतौर पर उन कर्मचारियों को रिलेट किया, जिन्हें रविवार की रात से ही सोमवार और आने वाले काम का तनाव सताने लगता है। सोशल मीडिया यूजर्स के मुताबिक, नौकरी के साथ आने वाला यह ‘Monday Blues’ आज की कॉर्पोरेट लाइफ का आम हिस्सा बनता जा रहा है।