शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस साल 7 जून को मनाए जाने वाले बकरीद के त्योहार को लेकर बयान दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गाय हमारी माता है और हमारी बहुत बड़ी आस्था उसके साथ जुड़ी है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से कहा कि उन्हें अपने धर्म और मान्यता को मानने के लिए जो करना है, वो करें, लेकिन ऐसा कोई भी कृत्य न करें जिससे हमें चोट पहुंचती हो। उन्होंने बकरीद पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस्लामी इतिहास के मुताबिक उनके अब्राहिम को ईश्वर ने कहा कि अपनी सबसे प्रिय वस्तु हमें दे दो। तो वह अपने बेटे की कुर्बानी करने के लिए चले गए। लेकिन अंत में ईश्वर ने उनके बेटे के स्थान पर एक बकरी को भेज दिया। उन्होंने कहा कि आप अपनी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी दें। लेकिन वो कोई बाजार से खरीदी हुई बकरी नहीं होनी चाहिए। ईश्वर की ओर से भेजी जाने वाली बकरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वो बकरी आपकी सबसे प्रिय वस्तु है, तो आप उसे सालभर अपने घर में क्यों नहीं पालकर रखते? क्यों बकरीद के समय बाजार से खरीदकर लाते हैं?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस साल 7 जून को मनाए जाने वाले बकरीद के त्योहार को लेकर बयान दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गाय हमारी माता है और हमारी बहुत बड़ी आस्था उसके साथ जुड़ी है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से कहा कि उन्हें अपने धर्म और मान्यता को मानने के लिए जो करना है, वो करें, लेकिन ऐसा कोई भी कृत्य न करें जिससे हमें चोट पहुंचती हो। उन्होंने बकरीद पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस्लामी इतिहास के मुताबिक उनके अब्राहिम को ईश्वर ने कहा कि अपनी सबसे प्रिय वस्तु हमें दे दो। तो वह अपने बेटे की कुर्बानी करने के लिए चले गए। लेकिन अंत में ईश्वर ने उनके बेटे के स्थान पर एक बकरी को भेज दिया। उन्होंने कहा कि आप अपनी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी दें। लेकिन वो कोई बाजार से खरीदी हुई बकरी नहीं होनी चाहिए। ईश्वर की ओर से भेजी जाने वाली बकरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वो बकरी आपकी सबसे प्रिय वस्तु है, तो आप उसे सालभर अपने घर में क्यों नहीं पालकर रखते? क्यों बकरीद के समय बाजार से खरीदकर लाते हैं?






