सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने जंगल की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार को करारी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तराखंड सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से राज्य सरकार चुपचाप देखती रही, जबकि ऋषिकेश में हजारों एकड़ जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया। यह जमीन मूल रूप से 1950 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने गांधीवादी मेडेलिन स्लेड (मीराबेन) को दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं, अधिकारियों और कब्जा करने वालों के बीच मिलीभगत की आशंका जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि 2000 से 2023 तक निजी लोगों ने लगातार जंगल की ज़मीन पर कब्जा किया, जबकि सरकार निष्क्रिय रही। कोर्ट ने इसे एक चौंकाने वाला मामला बताया।
उत्तराखंड के डिप्टी एडवोकेट जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2023 में कब्ज़ा करने वालों से लगभग 500 एकड़ जमीन वापस ली गई और पिछले तीन दिनों में ऋषिकेश में 50 एकड़ और जमीन वापस ली गई है। सरकार अपना अतिक्रमण विरोधी अभियान जारी रखेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कब्जा करने वालों द्वारा लंबे समय तक अवैध कब्जा मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
यह मामला लगभग 2866 एकड़ जंगल की जमीन से जुड़ा है। इस जमीन का एक हिस्सा पशुलोक सेवा समिति को लीज पर दिया गया था जो मीराबेन के पशुलोक आश्रम से जुड़ी थी। 1984 में समिति दिवालिया हो गई और 594 एकड़ जमीन वन विभाग को वापस कर दी गई। जमीन वापस मिलने के बाद कुछ लोगों ने इस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से दो हफ्ते के अंदर एक विस्तृत हलफनामा मांगा है। सरकार अब सुप्रीम कोर्ट को अतिक्रमण के बारे में पूरी जानकारी, जमीन पर बनी इमारतों का विवरण और 2000 से 2023 तक सरकारी जमीन की रक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के नाम देगी।
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22 दिसंबर को अपने पिछले आदेश में कोर्ट ने एक जांच समिति बनाने का निर्देश दिया था और कब्जा करने वालों को ज़मीन बेचने या किसी तीसरे पक्ष को अधिकार हस्तांतरित करने से रोक दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सरकार चुप रही जबकि उसकी नाक के नीचे जंगल की जमीन लूटी जा रही थी। सरकार जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करने वाली है।