प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
SIR Phase 2 Results: लोकतंत्र में एक वोट की कीमत कितनी होती है, यह हम सब जानते हैं, लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि देश के करोड़ों लोगों के नाम एक साथ वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएं? चुनाव आयोग ने हाल ही में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ के दूसरे चरण की प्रक्रिया पूरी की है जिसके नतीजे चौंकाने वाले हैं।
इस बड़ी सफाई अभियान के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट से लगभग 6.08 करोड़ नाम कम हो गए हैं। अगर आप उत्तर प्रदेश या पश्चिम बंगाल के निवासी हैं, तो आपको अपनी स्थिति और भी गंभीरता से जांचने की जरूरत है, क्योंकि इन राज्यों में नाम कटने की संख्या सबसे अधिक है।
इस विशेष अभियान के दौरान सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यूपी में मतदाताओं की संख्या में 13.24 प्रतिशत की भारी कमी आई है। यहां 2.04 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम लिस्ट से काट दिए गए हैं, जिसके बाद अब कुल मतदाताओं की संख्या 13.39 करोड़ रह गई है।
पश्चिम बंगाल की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है, जहां करीब 90.83 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। बंगाल जैसे चुनावी राज्य में इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना न केवल राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि आम जनता के बीच भी इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अन्य राज्यों जैसे तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात और केरल में भी इसी प्रक्रिया के तहत लिस्ट को अपडेट किया गया है।
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ब्लॉक लेवल ऑफिसर और बूथ लेवल एजेंट घर-घर जाकर वोटरों का भौतिक सत्यापन करते हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन लोगों के नाम हटाना है जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो अब उस पते पर नहीं रहते।
इसके अलावा, जिन लोगों के नाम दो अलग-अलग जगहों की वोटर लिस्ट में दर्ज थे, उन्हें भी एक जगह से हटा दिया गया है। आयोग का कहना है कि पिछले 21 सालों से यह व्यापक सुधार बाकी था, जिससे मतदाता सूची में कई अशुद्धियां आ गई थीं। इस सफाई के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल योग्य और वास्तविक वोटर ही सूची में शामिल रहें।
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इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कई मोर्चों पर चुनौतियां भी देखने को मिली हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक दलों ने इस सुधार प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। फिलहाल, आयोग ने देश के करीब 60 करोड़ मतदाताओं को इस अभियान के दायरे में ले लिया है, जबकि 39 करोड़ वोटरों का सत्यापन अभी बाकी है। अब तीसरे चरण की शुरुआत होने वाली है, जिसमें 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया जाएगा। यह प्रक्रिया मौजूदा पांच विधानसभा चुनावों के खत्म होने के ठीक बाद शुरू होगी।