UP में कुछ बड़ा होने वाला है? CM योगी ने की ताबड़तोड़ बैठकें, दिल्ली से लखनऊ पहुंचे विनोद तावड़े, हलचल तेज

BJP organization reshuffle UP: सीएम योगी और प्रदेश अध्यक्ष की बैठक के बाद सरकार और संगठन में बड़े बदलाव के संकेत। 15 अप्रैल तक नई टीम की घोषणा और मंत्रिमंडल में फेरबदल संभव।
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CM योगी, पंकज चौधरी (Image- Social Media)
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UP Politics: यूपी में विधानसभा चुनाव की घोषणा में अभी करीब दस महीने का समय बाकी है, लेकिन इसके पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश मंत्रिमंडल में फेरबदल और बीजेपी संगठन में नए पदाधिकारियों की घोषणा को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में शनिवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने मुलाकात की, जिसके बाद बड़े बदलावों के संकेत मिल रहे हैं।

सरकार और संगठन में बदलाव के संकेत

पार्टी सूत्रों के अनुसार, जल्द ही सरकार और संगठन दोनों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के लखनऊ दौरे को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे सीएम योगी, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि संगठन में बदलाव इसी महीने हो सकता है, जबकि मंत्रिमंडल में फेरबदल पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद संभव है।

संगठन में जल्द घोषणा संभव

पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही नई टीम के ऐलान की चर्चा थी। उम्मीद थी कि होली के बाद पदाधिकारियों की सूची जारी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब पार्टी इसे ज्यादा देर तक टालना नहीं चाहती। सूत्रों के मुताबिक, 15 अप्रैल के आसपास संगठन के नए पदाधिकारियों के नाम घोषित किए जा सकते हैं, ताकि उन्हें चुनावी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकें।

मंत्रिमंडल में फेरबदल कब?

जहां तक मंत्रिमंडल में बदलाव का सवाल है, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि चुनाव से पहले एक बार फेरबदल जरूर होगा। हालांकि अप्रैल में इसकी संभावना कम मानी जा रही है। इस फैसले में केंद्रीय नेतृत्व की अहम भूमिका होती है, और फिलहाल उसका ध्यान पश्चिम बंगाल चुनाव पर केंद्रित है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल कुछ समय बाद ही हो सकता है।

आयोग और निगमों में भी नियुक्तियां संभव

सीएम योगी के साथ हुई बैठक को लेकर यह भी चर्चा है कि कुछ नेताओं को आयोगों और निगमों में समायोजित करने पर विचार किया गया है। चुनाव से पहले जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए पार्टी इस तरह के कदम उठा सकती है, जिससे संगठनात्मक मजबूती बढ़ाई जा सके।

चुनावी रणनीति पर फोकस

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी हिंदुत्व और विकास के मुद्दों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही सीएम योगी सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों और पीएम मोदी के नेतृत्व को भी प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी संगठन को मजबूत कर चुनावी रणनीति को धार देने की कोशिश में है।

वहीं, समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से बीजेपी को कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है। लोकसभा चुनाव में झटका झेल चुकी बीजेपी इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि संगठन और सरकार में संभावित बदलावों में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा जा सकता है।

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