UP Election 2027: SP के समीकरण पर कितना असर डालेगी ओवैसी की एंट्री? 250 सीटों पर खेला करने की तैयारी में AIMIM

Asaduddin Owaisi UP Elections: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में AIMIM ने मुस्लिम प्रभावी सीटों पर फोकस बढ़ाया है। गठबंधन नहीं हुआ तो ओवैसी की पार्टी 200-250 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।
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असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादवसौजन्य-IANS
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AIMIM alliance UP Election: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। इस बीच आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी प्रदेश में अपना सियासी खाता खोलने की कोशिश में लगी हुई है। पार्टी की पहली प्राथमिकता गठबंधन है, लेकिन अगर सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बनी तो AIMIM अकेले चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश के चुनावी महत्व को समझते हैं। यही वजह है कि पार्टी उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।

औवेसी ने इन सीटों पर बढ़ाई सियासी हलचल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर तराई क्षेत्र के बहराइच तक ओवैसी खुद दौरा कर पार्टी की संभावनाओं का जायजा ले चुके हैं। पार्टी ने फिलहाल प्रयागराज, बहराइच, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा की कई विधानसभा सीटों पर अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं।

इन क्षेत्रों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी की कोशिश चुनाव से पहले ऐसे इलाकों में अपना सियासी आधार मजबूत करने की है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में AIMIM

गठबंधन को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। ऐसे में AIMIM ने अपने विकल्प खुले रखे हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, यदि किसी दल के साथ गठबंधन नहीं होता है तो AIMIM अपने दम पर करीब 200 से 250 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर सकती है।

वरिष्ठ पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि AIMIM को उत्तर प्रदेश में वर्ष 2023 के निकाय चुनाव के प्रदर्शन से राजनीतिक आधार मजबूत करने का अवसर मिला। पार्टी के कई प्रत्याशियों ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

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मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण

अब AIMIM इसी स्थानीय चुनावी सफलता को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के कई हिस्सों में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ऐसे में यदि AIMIM इन क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाने में सफल रहती है तो उसका असर केवल उसके वोट प्रतिशत तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि समाजवादी पार्टी के चुनावी समीकरण पर भी पड़ सकता है। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनावों में AIMIM का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा है और पार्टी अब तक विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी है।

ओवैसी बाहर हुई तो मतों का होगा बंटवारा

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हुज्जत रजा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की राजनीति में यदि ओवैसी की AIMIM गठबंधन से बाहर रहकर चुनाव लड़ती है तो उसका असर मुख्य रूप से विपक्षी मतों के बंटवारे के रूप में सामने आ सकता है, जिसका लाभ भाजपा को मिलने की संभावना रहेगी। वहीं, यदि सपा-कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन AIMIM को साथ लेता है तो चुनावी तस्वीर अलग हो सकती है और विपक्ष को इसका लाभ मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं और दलों के साथ संभावित तालमेल को भी 'भीम-मीम' समीकरण के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, अतीक अहमद के परिवार से जुड़े किसी चेहरे को चुनाव मैदान में उतारने की संभावना को लेकर अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

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गठबंधन के पक्ष में AIMIM

AIMIM सेंट्रल जोन के अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलने के लक्ष्य के साथ पूरी तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा, ''हम भाजपा को रोकने के लिए सभी विपक्षी दलों के साथ सम्मानजनक हिस्सेदारी वाले गठबंधन के पक्ष में हैं। बसपा के साथ गठबंधन की संभावना हो या चंद्रशेखर आजाद और अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का विकल्प, हमारा उद्देश्य भाजपा को रोकना है।''

उन्होंने कहा कि सितंबर तक गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई तो AIMIM उत्तर प्रदेश की 200 से 250 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी। पार्टी की बूथ स्तर तक तैयारियां चल रही हैं और पूरे प्रदेश से लगातार चुनाव लड़ने के लिए आवेदन मिल रहे हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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