यूपी में कुपोषण के खिलाफ अभियान तेज; बच्चों से माताओं तक पहुंच रहा संतुलित आहार

Uttar Pradesh Nutrition Campaign: टेक होम राशन योजना के तहत बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को जरूरत के अनुसार पोषण आहार दिया जा रहा है। योजना से 4 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार भी मिला है।
UP ake Home Ration Scheme Tackles Malnutrition While Creating Jobs for Over 4,000 Women
टीएचआर योजना ( सोर्स- फोटो नवभारत)
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UP Take Home Ration Scheme: उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान केवल पोषण सामग्री के वितरण तक सीमित नहीं है। टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के जरिए बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की अलग-अलग पोषण जरूरतों के अनुसार उत्पाद तैयार कर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

योजना के तहत शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसे सात उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें ऊर्जा, प्रोटीन, आयरन समेत जरूरी पोषक तत्व शामिल किए गए हैं। इससे लाभार्थियों को उनकी उम्र और जरूरत के अनुरूप पोषण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

बच्चों में नाटेपन की दर में लगातार गिरावट आई है। वर्ष 2015-16 में यह दर 46.3 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में घटकर 39.7 प्रतिशत हो गई। वहीं अब में यह आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा अल्पवजन और दुबलापन जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

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आंगनबाड़ी केंद्रों से पोषण के साथ निगरानी और जागरूकता

टीएचआर योजना की व्यवस्था को आंगनबाड़ी सेवाओं से जोड़ा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां लाभार्थियों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ बच्चों का वजन मापने, उनके विकास की निगरानी करने और गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण संबंधी परामर्श देने का काम करती हैं। परिवारों को संतुलित आहार और पोषण के महत्व के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी निभाई जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल पोषण सामग्री पहुंचाना नहीं, बल्कि लाभार्थियों की जरूरत को समझकर उन्हें लगातार पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराना है।

4 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार, गांवों में मजबूत हुई आर्थिक भागीदारी

टेक होम राशन योजना को महिला सशक्तीकरण से जोड़ना इसकी अहम विशेषता है। उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। वर्तमान में 4,000 से अधिक महिलाएं इन उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं।

इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आय का अवसर मिला है और स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को भी विस्तार मिला है। पोषण उत्पाद तैयार करने से लेकर उनकी आपूर्ति व्यवस्था तक महिलाओं की भागीदारी ने योजना को आजीविका और पोषण, दोनों से जोड़ दिया है।

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गुणवत्ता व साफ-सफाई को लेकर सख्त निर्देश

बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर शासन ने सम्बंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। भोजन की गुणवत्ता उच्च स्तर की होना अनिवार्य है।

खाना बनाने से पहले खाद्य सामग्री की अच्छी तरह सफाई और हरी सब्जियों को दो से तीन बार पानी से धोना सुनिश्चित किया जाए। बच्चों को परोसने से पहले हर दिन कम से कम दो वयस्कों द्वारा भोजन की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। स्वच्छता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

9 साल में बदला पोषण अभियान का स्वरूप

पिछले 9 वर्षों में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के द्वारा उत्तर प्रदेश में पोषण सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। डिजिटल निगरानी, पारदर्शी वितरण व्यवस्था और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी के साथ पोषण अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश हुई है।

टीएचआर मॉडल में एक ओर बच्चों और माताओं को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने पर जोर है, तो दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता तैयार किया गया है। योगी सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए प्रत्येक पात्र परिवार तक बेहतर पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं पहुंचाना है।

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