शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज (सोर्स: सोशल मीडिया)
Swami Avimukteshwaranand FIR: प्रयागराज के झूंसी थाने में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के सनसनीखेज आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के कड़े आदेश के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत यह कार्रवाई की है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद झूंसी थाना पुलिस द्वारा की गई है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए 21 फरवरी को आवेदक की अर्जी स्वीकार की और पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। एडीजे विनोद कुमार चौरसिया के इस कड़े रुख के बाद पुलिस हरकत में आई और मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है।
इस पूरे विवाद की जड़ में स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य और शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत है। शिकायतकर्ता के अनुसार, माघ मेले के दौरान एक नाबालिग और एक बालिग बच्चा उनके पास आया था, जिन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर कुकर्म के अत्यंत गंभीर आरोप लगाए थे।
आशुतोष ब्रह्मचारी का आरोप है कि उन्होंने इन पीड़ितों की ओर से पहले झूंसी थाने में तहरीर दी थी, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद उन्होंने 28 जनवरी को धारा 173(4) के तहत जिला न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहाँ से अब उन्हें राहत मिली है।
झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर में केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ही नहीं, बल्कि उनके शिष्य मुकदानंद ब्रह्मचारी और दो-तीन अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इस मामले में अत्यंत गंभीर धाराएं लगाई हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351(3) के अलावा, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 की धारा 3, 4(2), 5, 6, 16 और 17 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। विशेष रूप से पॉक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 ‘एग्रवेटेड पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ से संबंधित हैं, जिनमें कानूनन कठोर सजा का प्रावधान है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने न केवल प्रयागराज बल्कि पूरे देश के धार्मिक और आध्यात्मिक जगत में हलचल पैदा कर दी है। प्रयागराज पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद साक्ष्यों का संकलन किया जा रहा है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। शिकायतकर्ता का दावा है कि पीड़ितों ने अपनी आपबीती में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
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फिलहाल पुलिस नाबालिग और बालिग पीड़ितों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में है, जिसके बाद आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर बहस छेड़ दी है।