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Swami Avimukteshwaranand Bail AHC: इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। यह मामला जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की कोर्ट नंबर 72 में लिस्टेड है। कानूनी गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या आज इस मामले पर बहस हो पाएगी, क्योंकि याचिका का सीरियल नंबर 142 है।
आमतौर पर इतने पीछे के नंबर पर सुनवाई होना मुश्किल माना जाता है, लेकिन मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण वादी पक्ष की ओर से इसे कोर्ट में ‘मेंशन’ किया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि दोपहर में लंच के बाद इस केस की पुकार हो सकती है। यदि आज सुनवाई टलती है, तो पुलिस के पास कार्रवाई के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा, जो स्वामी जी की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के लिए सबसे बड़ी चुनौती मेडिकल रिपोर्ट बनकर उभरी है। हाल ही में हुए बटुकों के मेडिकल परीक्षण में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो गई है, जिसने पुलिस के पक्ष को काफी मजबूत कर दिया है। पॉक्सो (POCSO) जैसी गंभीर धाराओं में मेडिकल साक्ष्य मिलने के बाद अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इसी दबाव के चलते उन्होंने हाई कोर्ट का रुख कर अंतरिम राहत की गुहार लगाई है ताकि जांच के दौरान उन्हें जेल न जाना पड़े।
एक तरफ जहां कानूनी फंदा कसता जा रहा है, वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इसे ‘सत्ता की साजिश’ करार दे रहे हैं। उनका आरोप है कि शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज और पुलिस की मिलीभगत से उन्हें फंसाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिन बच्चों को पीड़ित बताया जा रहा है, वे लंबे समय से शिकायतकर्ता के पास ही रह रहे थे, जिसके सबूत वे अदालत में पेश करेंगे।
वहीं, इस मामले में एक नया पेच ‘कोड C27’ के रूप में सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, करोड़ों के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के खुलासे ने इस मामले को और भी पेचीदा बना दिया है। पुलिस न केवल यौन शोषण के आरोपों की जांच कर रही है, बल्कि आश्रम के आर्थिक पहलुओं और ‘C27’ कोड के पीछे के वित्तीय नेटवर्क की भी गहराई से पड़ताल कर रही है।
खुलासे में पीड़ित बटुकों ने बेहद चौंकाने वाले बयान दिए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें गुरु दीक्षा के बहाने अविमुक्तेश्वरानंद के सामने पेश किया जाता था और फिर उनके साथ ‘गंदा काम’ होता था। इन बयानों और साक्ष्यों के बीच आज हाईकोर्ट का रुख बेहद महत्वपूर्ण होगा।
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यदि कोर्ट अग्रिम जमानत देने से इनकार करता है, तो उत्तर प्रदेश पुलिस किसी भी समय उन्हें हिरासत में ले सकती है। पूरे संत समाज और आम जनता की निगाहें आज जस्टिस सिन्हा के फैसले पर टिकी हैं कि क्या धर्म के इस बड़े चेहरे को अदालत से अभयदान मिलेगा या कानून अपनी सख्त राह पकड़ेगा।