

Shankaracharya in Mainpuri: शंकराचार्य अपने धर्मयात्रा के तहत आज मैनपुरी पहुंचे। यहां सपा सांसद डिंपल यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से आशीर्वाद लिया। डिंपल यादव ने इस दौरान शंकराचार्य को शॉल भेंट कर उनके पैर छुए। शंकराचार्य ने मैनपुरी में गौ-माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की अपनी मांग दोहराई। डिंपल यादव ने मुलाकात के बाद शंकराचार्य से कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके साथ हैं और वो हमेशा रहेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि शंकराचार्य का जो अपमान हुआ है, उसकी प्रकृति जरूर बदला लेगी।
लगभग 1 घंटे के कार्यक्रम के बाद शंकराचार्य किशनी के लिए रवाना हो गए। इस दैरान शंकराचार्य ने कन्नौज में सड़क पर रात बिताने वाली घटना का भी जिक्र किया। शंकराचार्य ने कहा कि अखिलेश यादव ने माफी मांगी है और दुख जताया है कि उनके क्षेत्र में हं लोगों को परेशानी हुई है। डिंपल जी ने भी उस घटना पर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि हम यही कहेंगे कि इसमें आपकी गलती ही नहीं थी तो माफी किस बात की।
इस दौरान डिंपल यादव ने कहा कि हम सभी की तरफ से आपका बहुत-बहुत आदर-सत्कार और आपको बहुत-बहुत नमन। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सनातन धर्म का अपमान हो रहा है उसे पूरा देश-विदेश देख रहा है। डिंपल ने कहा कि सत्ता में बने हुए जो लोग हैं, वो किस तरह शंकराचार्य का अपमान कर रहे हैं।
डिंपल यादव ने कहा कि जिस तरह चार स्तंभ होते हैं, जिस तरह चार वेद होते हैं, उसी तरह शंकराचार्य जी का भी ओहदा है और उनकी हस्ती है। उन्होंने कहा कि आपका जिस तरह से अपमान हुआ है हमें पूरा भरोसा है कि ये प्रकृति आपके अपमान का बदला जरूर लेगी। मैं बस यही कहना चाहूंगी कि आपके संघर्ष में हम सभी, हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी आपके साथ हैं और हमेशा रहेंगे।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, आज देश का मुसलमान वो बात कह रहा है जो तथाकथित हिन्दू सम्राट नहीं कह पा रहा। जो भगवा पहनता है, गोरक्षपीठ का महंत है, उसकी जीभ अटकती है। और ये मुस्लिम बंधु, जिन पर कोई दायित्व नहीं वे आगे आकर यह मांग करते हैं। जिन्होंने इस बक़रीद लाखों गायें बचाईं, उन्हें पशुबुद्धि कहना किस हिन्दुत्व का प्रमाण है? हिन्दुत्व की असली कसौटी भाषा नहीं है। कसौटी यह है, क्या आप कह सकते हैं कि गाय मेरी माता है? जो कह सकते हैं, वे हिन्दू। जो नहीं कह सकते, चाहे कोई भी वस्त्र पहनें, चाहे कोई भी दावा करें, वे नहीं हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मैनपुरी में कहा कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना उनका मुख्य संकल्प है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मांग को संवैधानिक मान्यता नहीं मिल जाती, तब तक उनका ये आंदोलन लगातार चलता रहेगा।
मालूम हो कि एक दिन पहले कन्नौज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को चौराहे पर रात बितानी पड़ी थी। इस दौरान शंकराचार्य ने कहा था कि प्रशासन हमें परेशान कर रहा है। जिस स्कूल में हमें रात में रुकना था। परमिशन न होने का हवाला देते हुए प्रशासन ने वहां हमें ठहरने से मना कर दिया, इसलिए हमने सरकारी जमीन पर रुकने का फैसला किया। यहीं पर रात बिताएंगे। उन्होंने कहा था कि हम गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने के लिए निकले हैं। 150 विधानसभाओं में हम होकर आ चुके हैं। हम अपनी इस यात्रा को पूरी करके रहेंगे।