

Shankaracharya Avimukteshwaranand: प्रयागराज स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनोंं गाय को पशु की जगह माता घोषित करने और गौरक्षा के लिए ‘गौ रक्षा धर्मयुद्ध यात्रा’ अभियान चला रहे हैं। इस यात्रा की शुरुआत 3 मई को वाराणसी से शुरू हुई थी। इसके अब कन्नौज में रोक दिया गया है। शंकराचार्य की टीम ने आरोप लगाया कि प्रशासन के दबाव के चलते स्थानीय आयोजक आखिरी समय में पीछे हट गए।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गौरक्षा यात्रा बुधवार को कन्नौज पहुंची। हालांकि यात्रा के कन्नौज पहुंचे ही इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया। स्थानीय प्रशासन ने पहले ही निर्धारित व्यवस्थाएं अचानक निरस्त कर दिया। इसके चलते विवाद दी स्थिति पैदा हो गई। शंकराचार्य की टीम ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन के दबाव के चलते कन्नौज में यात्रा से जुड़े आयोजकों ने कार्यक्रम से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के प्रतिनिधि शैलेंद्र योगीराज ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन के दबाव के चलते कन्नौज में यात्रा से जुड़े आयोजकों ने आखिरी समय में कार्यक्रम से हाथ पीछे खींच लिए हैं। उन्होंने कहा कि, पूर्व निर्धारित व्यवस्थाएं अचानक निरस्त कर दी गईं, जिससे यात्रा दल को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रतिनिधि के मुताबिक, हालात ऐसे बन गए कि शंकराचार्य को कन्नौज में देर रात सड़क किनारे अपनी कार में ही रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा। शैलेंद्र योगीराज ने इसे लेकर कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। जो उनके दावे के पुष्टि करते हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में आयोजकों के आरोपों और प्रशासनिक पक्ष को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
कन्नौज से पहले यात्रा औरैया पहुंची, जहां भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसलिए उसे सिर्फ एक पशु के देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गौ माता का सम्मान और संरक्षण केवल सरकारों की नहीं, उसकी जिम्मेदारी पूरे समाज की है। उन्होंने लोगों से गौ माता की रक्षा के लिए आगे और अभियान को मजबूत करने की अपील की।