जो कमाई होगी, सबमें बराबर बंटेगी... शाहजहांपुर में BJP पार्षदों ने खाई ऊपर की कमाई बांटने की कसम, देखें VIDEO

Shahjahanpur BJP Councillors: शाहजहांपुर नगर निगम के कई पार्षदों का कथित वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे नगर निगम की आमदनी को बराबर बांटने की शपथ लेते नजर आ रहे हैं। देखें पूरी खबर।
Shahjahanpur Councillors Viral Video
शाहजहांपुर पार्षदों का वायरल वीडियोसोर्स-सोशल मीडिया
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Shahjahanpur Municipal Corporation: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर नगर निगम के कई पार्षदों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। वायरल वीडियो में कुछ पार्षद हथेली पर पानी लेकर नगर निगम की कथित आमदनी को आपस में बराबर बांटने की शपथ लेते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में एक पार्षद अन्य पार्षदों को शपथ दिलाता है और बाकी उसे दोहराते दिखाई देते हैं। शपथ के दौरान कथित तौर पर गद्दारी करने वाले पार्षद को लेकर आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया गया। वीडियो में नजर आ रहे ज्यादातर पार्षदों के भाजपा से जुड़े होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो करीब छह महीने पुराना बताया जा रहा है और मंगलवार दोपहर सामने आने के बाद से वायरल हो गया है।

शपथ में निगम की आमदनी को बराबर बांटने की बात

बात दें कि वायरल वीडियो में शाहजहांपूर नगर निगम के पार्षद यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि नगर निगम से होने वाली आमदनी को सभी पार्षदों में बराबर- बराबर बांटी जाएगी। वहीं उन्होंने आगेन कहा की अगर किसी एक पार्षद पर किसी भी प्रकार की आंच आई तो सभी पार्षद एक साथ होकर उसके साथ खड़े होंगे।

जिसके बाद एक निगम के पार्षद ने आपस में गद्दारी करने वाले को लेकर मां का नाम लेकर आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया। हालांकि कुछ पार्षद शपथ लेने के दौरान हाथ में लिए हुए पानी को जमीन पर निचे गिराते हुए दिखाई दे रहे हैं। जबकि वहीं कुछ पार्षदों ने उस पानी को पी लिया।

शाहजंहापूर महापौर ने जानकारी से किया इनकार

निगम पार्षदों के वायरल वीडियो को लेकर शाहजहांपुर की महापौर अर्चना वर्मा ने इस विषय में कोई भी जानकारी होने से साफ-साफ इनकार कर दिया। जिसके बाद नगर आयुक्त से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, हालांकि उन्होंने फोन नहीं उठाया जिससे बात नहीं हो सकी।

वीडियो में शपथ दिलाते नजर आ रहे पार्षद लालू पुजारी से भी संपर्क साधने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कार्रवाई की मांग की

कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने वायरल विडियो पर निशाना साधते हुए कहा कि 'शाहजहांपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है।

निगम के पार्षदों ने चुनाव जीतने के बाद शपथ ली थी। जिसके बाद अब वीडियो में दूसरी तरह की शपथ सामने आ रही है। इसमें पार्षदों की असली शपथ कौन-सी है, हम इसके बारें में जल्द से जल्द निगम के अधिकारियों से मिलकर इस मामले में कार्रवाई की मांग करेंगे।

सपा नेता ने उठाए सवाल

शाहजहांपुर के समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने भी इस विडियो पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नगर निगम जनता से जुड़ी कार्य-प्रणाली है।

नगर निगम के पार्षदों के द्वारा इस वीडियो में शपथ लेते हुए जिस तरह की बातें कही जा रही हैं, उससे क्षेत्र की जनता के बीच गलत संदेश जाएगा। निगम के अधिकारी इस विडियो पर कार्रवाई करें।

2018 में नगर निगम बना था शाहजहांपुर

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर को 17 अप्रैल 2018 को नगर पालिका से नगर निगम का दर्जा दिया गया था। इसके बाद 2023 में नगर निगम चुनाव हुए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के 41 पार्षद चुनाव जीते थे।

इसके अलावा अन्य राजनीतिक दलों के पार्षद भी निर्वाचित हुए, जबकि कुछ सदस्यों को शासन की ओर से नामित किया गया।

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नगर निगम पर पहले भी लग चुके हैं भ्रष्टाचार के आरोप

शाहजहांपुर नगर निगम पहले भी भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। हाल ही में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और टेंडर में गड़बड़ी के आरोप में भदौरिया कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक सुनील कुमार सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। कार्रवाई के तहत संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया था।

आउटसोर्सिंग भर्ती में भी अनियमितता के लगे आरोप

शाहजहांपुर नगर निगम में आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। आरोप है कि निगम के कुछ बाबुओं और कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों व करीबी लोगों को सफाई कर्मचारी के पद पर नौकरी दिला दी। इनमें कुछ ऐसे कर्मचारी भी सामने आए, जो ड्यूटी पर पहुंचे बिना ही वेतन प्राप्त कर रहे थे।

22 कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल

जांच के दौरान 22 ऐसे कर्मचारियों की पुष्टि हुई, जिनकी तैनाती और उपस्थिति को लेकर संदेह सामने आया। इसके बाद नगर निगम ने इन कर्मचारियों का वेतन रोक दिया।

अब पूरे मामले में भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

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