

Sonbhadra Mine Incident: परिचय सोनभद्र जिले के ओबरा क्षेत्र स्थित बिल्ली मारकुंडी कोयला/पत्थर खदान में शनिवार दोपहर बाद हुए हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य तेजी से जारी है। अब तक मलबे के नीचे से सात मजदूरों के शव निकाले जा चुके हैं। हादसा इतना भयावह था कि शवों की हालत देखकर मौके पर मौजूद लोग सिहर उठे। प्रभारी मंत्री ने मृतकों के परिजनों को 20.55 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी स्थित मेसर्स श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की पत्थर खदान में ड्रिलिंग के दौरान चट्टान गिरने से यह बड़ा हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय खदान में लगभग 15 मजदूर काम कर रहे थे। चट्टान धंसने से ये सभी मजदूर मलबे की चपेट में आ गए। राहत-बचाव कार्य पिछले 48 घंटों से जारी है। सोमवार (18 नवंबर 2025) शाम तक मलबे के नीचे से सात मजदूरों के शव निकाले जा चुके थे।
हादसा इतना भयावह था कि शव देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। शव इतने ज्यादा टुकड़ों में बिखर चुके थे और क्षत-विक्षत थे कि उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो रहा था। परिजनों को काफी देर तक चिथड़ों में अपनों को तलाशना पड़ा। पहचान हाथ में बंधे कलावा और गोदना (टैटू) से हुई, तो किसी की पहचान उसके कपड़ों से की गई। अलग-थलग पड़े शरीर के अंगों को सहेजकर पोस्टमॉर्टम कराया गया और फिर कपड़े में लपेटकर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपा गया।
बरामद सात शवों में से दो सगे भाई शामिल हैं। पनारी गांव के करमसार टोला निवासी इंद्रजीत यादव (32) और संतोष यादव (30) की मलबे में दबकर मौत हो गई। अन्य मृतकों में रविंद्र उर्फ नानक, रामखेलावन (40), और गुलाब उर्फ मुंशी शामिल हैं। छठे शव की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है। जिले के प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर परिजनों से शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घोषणा की कि हादसे में मृत सभी मजदूरों के परिजनों को 20.55 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। अब तक बरामद सात शवों में से पांच का अंतिम संस्कार परिजनों द्वारा कर दिया गया है।
इस हादसे के बाद खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस खदान में यह दुर्घटना हुई, उसकी जांच के लिए पिछले वर्ष छह अफसरों की संयुक्त टीम (खान सुरक्षा, यूपीपीसीबी, खनन और प्रशासन) ने दौरा किया था। इस टीम ने सुरक्षा उपकरणों का उपयोग और बेंच बनाकर खनन का दावा करते हुए संचालकों को क्लीन चिट दे दी थी। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम को खदान की गहराई नजर नहीं आई थी।
राहत एवं बचाव कार्य में एनडीआरएफ (NDRF) की टीम, जिला प्रशासन और खदान प्रबंधन की टीमें जुटी हुई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह तय नहीं हो जाता कि खदान में और कोई नहीं फंसा है, तब तक बचाव अभियान जारी रहेगा। लापता अन्य मजदूरों को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है।