'ए फॉर आतंकवाद, अतीक और अखिलेश...', भाजपा नेता संगीत सोम ने दिया विवादित बयान; अखिलेश यादव पर साधा निशाना

Sangeet Som On PDA: भाजपा नेता संगीत सोम ने सरधना विधानसभा क्षेत्र के भगवानपुर गांव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की नवनिर्मित प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधा।
Sangeet Som On PDA
संगीत सोम (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Sangeet Som Statement: उत्तर प्रदेश में भाजपा के फायरब्रांड नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम ने सोमवार को सरधना विधानसभा क्षेत्र के भगवानपुर गांव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की नवनिर्मित प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला और वर्णमाला के अक्षर ‘ए’ को लेकर विवादित टिप्पणी की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘पीडीए’(पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर पलटवार करते हुए सोम ने कहा कि अब यह नारा खत्म हो चुका है।

उन्होंने ‘ए’ की अपनी व्याख्या देते हुए कहा कि इसका मतलब ‘आतंकवाद, अतीक अहमद और अखिलेश यादव’ है और कहा कि भाजपा सरकार ने पहले दो पर कार्रवाई कर दी है। इसके अलावा उन्होंने हाल ही में आई फिल्म धुरंधर द रिवेंज का भी जिक्र किया।

अखिलेश यादव को लेकर क्या कहा?

संगती सोम ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा उन्होंने कहा कि अखिलेश को दलितों के हक में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि उनके कार्यकाल में दलित महापुरुणों के नाम पर रखे गए जिलों का नाम बदलकर समाज का अपमान किया गया था।

संगीत सोम ने 'धुरंधर' बनने की अपील की

‘धुरंधर’ फिल्म का जिक्र करते हुए संगीत सोम ने युवाओं से धुरंधर बनने की अपील की और युवाओं को संदेश दिया कि मजबूत और जिम्मेदार बनें, जिससे समाज में आतंकवाद और गुंडागर्दी जैसी प्रवृत्तियों का डटकर मुकाबला किया जा सके। दरअसल, कुछ समय पहले असामाजिक तत्वों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने 30 मार्च तक नई प्रतिमा स्थापित कराने का संकल्प लिया था।

बाबा सहाब के कर्ज चुकाने का प्रयास- संगीत सोम

अनावरण के मौके पर भारतीय जनता पार्टी के नेता सोम ने कहा कि यह किसी पर अहसान नहीं बल्कि बाबा साहेब द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रति कर्ज चुकाने का एक छोटा प्रयास है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य समाज को एकजुट करना है, न कि जातियों के बीच विभाजन पैदा करना। इसके अलावा उन्होंने कहा कि महापुरुषों को जातियों और बिरादरियों के दायरे में नहीं बांधा जा सकता वह संपूर्ण समाज के लिए मार्गदर्शक होते हैं।

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