संभल में कब्रिस्तान की भूमि पर बनी मस्जिद पर प्रशासन का सख्त निर्देश, 15 दिन में हटाने का अल्टीमेटम

Uttar Pradesh के संभल में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए सुल्तानपुर खुर्द गांव में कब्रिस्तान की जमीन पर बनी दादामियां की मजार और मस्जिद को हटाने का निर्देश दिया।
Sambhal Mosque and Dadamiya Mazar Removal Order
संभल में कब्रिस्तान की भूमि पर बनी मस्जिद और मजार पर प्रशासन का हटाने का निर्देश (फोटो- सोशल मीडिया)
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Sambhal Mosque News: उत्तर प्रदेश के संभल में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है। सुल्तानपुर खुर्द गांव में कब्रिस्तान की जमीन पर बनी दादामियां की मजार और मस्जिद को हटाने के लिए प्रशासन ने सिर्फ 15 दिन का समय दिया है। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने अपनी टीम के साथ मौके का निरीक्षण करने के बाद यह सख्त निर्देश जारी किया है। इस फरमान के बाद से स्थानीय लोगों और मुतव्वली के बीच खलबली मच गई है और यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

मजार और मस्जिद की देखरेख करने वाले मुतव्वली मोहम्मद सुल्तान का कहना है कि यह धार्मिक स्थल उनके पुरखों के समय से मौजूद है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग अपनी आस्था लेकर आते हैं। उन्होंने प्रशासन के नोटिस पर भावुक होकर कहा कि अल्लाह के घर को हटाना इतना आसान काम नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि उन्हें 15 दिन का समय मिला है और अब वे मोहल्ले और बस्ती के लोगों से मशविरा करने के बाद ही इस पर कोई अंतिम फैसला लेंगे।

बाजार की भीड़ और शिकायत का सच

तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि वे जनता दर्शन में प्राप्त एक शिकायत की जांच करने के लिए मौके पर पहुंचे थे। स्थानीय निवासियों ने शिकायत में कहा था कि यहां लगने वाले साप्ताहिक बाजार की वजह से काफी असुविधा होती है। जांच के दौरान मुतव्वली मोहम्मद सुल्तान ने बाजार लगने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि गुरुवार को लगने वाले इस बाजार में दुकानदार अपनी मर्जी से 10-20 रुपये दे जाते थे। मुतव्वली ने यह भी कहा कि अगर इस बाजार से लोगों या प्रशासन को दिक्कत है, तो इसे बंद कर दिया जाएगा। प्रशासन ने निर्देश दिया है कि उप-जिलाधिकारी की अनुमति के बिना अब वहां बाजार नहीं लगाया जाएगा।

इस्लाम के सिद्धांतों का हवाला

प्रशासन ने इस मामले में न केवल कानूनी बल्कि धार्मिक तर्कों का भी हवाला दिया है। तहसीलदार ने बताया कि यह पूरी जमीन कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान की भूमि पर मस्जिद का निर्माण करना इस्लाम के सिद्धांतों के भी खिलाफ माना जाता है। इसी आधार पर प्रशासन ने मुतव्वली को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर इस निर्माण को हटा लें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के अंदर संबंधित पक्ष द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है, तो प्रशासन स्वयं अपने स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा।

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